कुरान - 41:54 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
أَلَآ إِنَّهُمۡ فِي مِرۡيَةٖ مِّن لِّقَآءِ رَبِّهِمۡۗ أَلَآ إِنَّهُۥ بِكُلِّ شَيۡءٖ مُّحِيطُۢ

Transliteration: (Alaaa innahum fee miryatim mil liqaaa'i Rabbihim; alaaa innahoo bikulli shai'im muheet (section 6))

ख़बरदार! बेशक वे अपने रब से मुलाक़ात (क़ियामत) के बारे में शक में पड़े हुए हैं [149]; ख़बरदार! बेशक वह हर चीज़ को पूरी तरह घेरे हुए है [150]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 54

ख़बरदार! बेशक वे अपने रब से मुलाक़ात (क़ियामत) के बारे में शक में पड़े हुए हैं [149]; ख़बरदार! बेशक वह हर चीज़ को पूरी तरह घेरे हुए है [150]!

[149] आख़िरत और दीदार-ए-इलाही के बारे में शक

काफ़िरों और मुशरिकों की असल गुमराही यह है कि वे क़यामत, दोबारा ज़िंदा किए जाने और अपने रब के हुज़ूर पेशी के बारे में शक व शुबहात में मुब्तिला हैं। यही शक उन्हें गुनाहों और कुफ़्र पर बेबाक बनाता है।

[150] इहाता-ए-इलाही और क़ुदरत-ए-कामिला

अल्लाह तआला का इल्म, क़ुदरत और तसर्रुफ़ कायनात की हर चीज़ को पूरी तरह घेरे हुए है। कोई इंसान, कोई अमल और कोई ज़र्रा उसकी सल्तनत व इल्म से बाहर नहीं निकल सकता। हर एक को उसके हुज़ूर हाज़िर होना है और अपने आमाल का हिसाब देना है।

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