कुरान - 41:52 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
قُلۡ أَرَءَيۡتُمۡ إِن كَانَ مِنۡ عِندِ ٱللَّهِ ثُمَّ كَفَرۡتُم بِهِۦ مَنۡ أَضَلُّ مِمَّنۡ هُوَ فِي شِقَاقِۭ بَعِيدٖ

Transliteration: (Qul araaitum in kaana min 'indil laahi summa kafar tum bihee man adallu mimman huwa fee shiqaqim ba'eed)

आप फ़रमा दीजिए: भला बताओ, अगर यह (क़ुरआन) अल्लाह की तरफ़ से ही हो [144] फिर तुम इसका इन्कार कर बैठो, तो उस शख़्स से ज़्यादा भटका हुआ कौन होगा जो दूर की मुख़ालिफ़त (ज़िद) में पड़ा हो? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 52

आप फ़रमा दीजिए: भला बताओ, अगर यह (क़ुरआन) अल्लाह की तरफ़ से ही हो [144] फिर तुम इसका इन्कार कर बैठो, तो उस शख़्स से ज़्यादा भटका हुआ कौन होगा जो दूर की मुख़ालिफ़त (ज़िद) में पड़ा हो?

[144] क़ुरआनी हक़्क़ानियत की क़तई दलील

यह सवाल मुनकिरीन को ग़ौर व फ़िक्र की दावत देता है कि ज़रा सोचो, अगर यह क़ुरआन यक़ीनन अल्लाह ही का सच्चा कलाम है (और बेशक यह बरहक़ है), तो इसका इन्कार करके तुम अल्लाह के अज़ाब से कैसे बच सकोगे! जो शख़्स इतनी रौशन हक़ीक़त के मुक़ाबले में ज़िद और हठधर्मी पर अड़ा रहे, उससे बड़ा गुमराह और बदबख़्त कौन हो सकता है!

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