कुरान - 41:48 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

48
وَضَلَّ عَنۡهُم مَّا كَانُواْ يَدۡعُونَ مِن قَبۡلُۖ وَظَنُّواْ مَا لَهُم مِّن مَّحِيصٖ

Transliteration: (Wa dalla 'anhum maa kaanoo yad'oona min qablu wa zannoo maa lahum mim mahees)

और वे (झूठे माबूद) जिनसे वे पहले दुआएं मांगते थे उनसे गुम हो जाएंगे [133], और उन्हें यक़ीन हो जाएगा [134] कि उनके लिए बचने की कोई जगह नहीं है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 48 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 48

और वे (झूठे माबूद) जिनसे वे पहले दुआएं मांगते थे उनसे गुम हो जाएंगे [133], और उन्हें यक़ीन हो जाएगा [134] कि उनके लिए बचने की कोई जगह नहीं है।

[133] झूठे माबूदों और बुतों का बे-निशान हो जाना

वे तमाम बुत और बातिल माबूद जिनकी वे दुनिया में पूजा करते थे, क़यामत के दिन ग़ायब और बेफ़ायदा हो जाएंगे। मुशरिक़ीन सख़्त हसरत व ना-उम्मीदी में घिर जाएंगे कि जिन पर भरोसा था वे ही दगा दे गए।

[134] लफ़्ज़ 'ज़न' का मफ़हूम 'यक़ीन'

यहां लफ़्ज़ 'ज़न' यक़ीन और क़तइयत के मानी में इस्तेमाल हुआ है। मुशरिक़ीन को मुकम्मल यक़ीन हो जाएगा कि अब अज़ाब-ए-इलाही से फ़रार या नजात का कोई ठिकाना और कोई पनाहगाह बाकी नहीं रही।

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