Transliteration: (Ilaihi yuraddu 'ilmus Saaa'ah; wa maa takhruju min samaraatim min akmaamihaa wa maa tahmilu min unsaa wa laa tada'u illaa bi'ilmih; wa Yawma yunaadeehim aina shurakaaa'ee qaalooo aazannaaka maa minnaa min shaheed)
क़ियामत का इलà¥à¤® उसी की तरफ़ लौटाया जाता है [129]; और कोई फल अपने गाà¤à¥‹à¤‚ से नहीं निकलता और कोई मादा न हामिला होती है और न बचà¥à¤šà¤¾ जनती है मगर उसके इलà¥à¤® के साथ [130]; और जिस दिन वह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पà¥à¤•ारेगा: कहां हैं मेरे शरीक [131]? वे कहेंगे: हमने तà¥à¤à¥‡ बता दिया कि हममें से कोई इस पर गवाह नहीं [132]!
क़यामत किस साल और किस मà¥à¤…यà¥à¤¯à¤¨ लमà¥à¤¹à¥‡ में आà¤à¤—ी, इसका ज़ाती इलà¥à¤® अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ही के पास है। अगरचे हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® को क़यामत की तमाम निशानियां, दिन (जà¥à¤®à¤¾) और तारीख़ (दसवीं मà¥à¤¹à¤°à¥à¤°à¤®) का इलà¥à¤® अता फ़रमाया गया, मगर साल को मख़à¥à¤«à¤¼à¥€ रखना हिकमत-à¤-इलाही का तक़ाज़ा था। (तफ़सीर रूहà¥à¤² बयान)
दरख़à¥à¤¤à¥‹à¤‚ की कलियों से निकलने वाले हर फल की तादाद, हर औरत और मादा के हमल, बचà¥à¤šà¥‡ की जिंस, उसकी उमà¥à¤° और उसके रिज़à¥à¤•़ का कामिल इलà¥à¤® अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला को अज़ल से है। कायनात की कोई जà¥à¤œà¤¼à¤‡à¤¯à¤¾à¤¤ उसके इलà¥à¤® से बाहर नहीं।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•़ीन को रà¥à¤¸à¤µà¤¾ करने के लिठपूछेगा कि कहां हैं वे बà¥à¤¤ और à¤à¥‚ठे माबूद जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तà¥à¤® मेरा शरीक ठहराते थे? आज वे तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥€ मदद कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं करते!
मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•़ीन बेबस होकर अरà¥à¤œà¤¼ करेंगे कि आज हममें से कोई à¤à¥€ उनकी ख़à¥à¤¦à¤¾à¤ˆ की गवाही देने वाला नहीं है; सब बà¥à¤¤ बातिल और बेअसर साबित हà¥à¤à¥¤
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