कुरान - 41:45 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَلَقَدۡ ءَاتَيۡنَا مُوسَى ٱلۡكِتَٰبَ فَٱخۡتُلِفَ فِيهِۚ وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمۡۚ وَإِنَّهُمۡ لَفِي شَكّٖ مِّنۡهُ مُرِيبٖ

Transliteration: (Wa laqad aatainaa Moosal Kitaaba fakhtulifa fee; wa lawlaa Kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum; wa innahum lafee shakkim minhu mureeb)

और यक़ीनन हमने मूसा को किताब अता फ़रमाई, तो उसमें भी इख़्तिलाफ़ किया गया; और अगर आपके रब की तरफ़ से एक बात पहले से तय न हो चुकी होती [125], तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता [126]; और बेशक वे इसके बारे में बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 45

और यक़ीनन हमने मूसा को किताब अता फ़रमाई, तो उसमें भी इख़्तिलाफ़ किया गया; और अगर आपके रब की तरफ़ से एक बात पहले से तय न हो चुकी होती [125], तो उनके दरमियान फ़ैसला कर दिया गया होता [126]; और बेशक वे इसके बारे में बेचैन करने वाले शक में पड़े हुए हैं।

[125] मुद्दत-ए-मोहल्लत का फ़ैसला

अल्लाह तआला का यह मुक़र्ररा क़ानून पहले से तय शुदा था कि उम्मत-ए-मुहम्मदिया पर आम हलाकत का अज़ाब दुनिया में नहीं आएगा और मुकम्मल हिसाब-किताब क़यामत के दिन होगा। अगर यह बात तय न होती तो उनकी सरकशी पर दुनिया ही में फ़ैसला कुन अज़ाब नाज़िल हो चुका होता।

[126] पिछली उम्मतों की मुशाबहत

जिस तरह हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम की तौरात के साथ बनी इसराईल ने इख़्तिलाफ़ किया, बाज़ ईमान लाए और बाज़ ने तहरीफ़ व इन्कार किया, उसी तरह क़ुरैश भी कर रहे हैं। मुनकिरीन हमेशा अपने शक और बदगुमानी में मुब्तिला रहते हैं।

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