Transliteration: (Man 'amila salihan falinafsihee wa man asaaa'a fa'alaihaa; wamaa rabbuka bizallaamil lil 'abeed (End Juz 24))
जिसने नेक अमल किया, तो अपनी ही ज़ात के फ़ायदे के लिठकिया [127], और जिसने बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ की, तो उसका वबाल उसी पर है; और आपका रब बंदों पर रतà¥à¤¤à¥€ बराबर à¤à¥€ ज़à¥à¤²à¥à¤® करने वाला नहीं है [128]।
इंसान का हर अमल—ख़à¥à¤µà¤¾à¤¹ नेकी हो या बदी—उसका असल फ़ायदा या नà¥à¤•़सान ख़à¥à¤¦ उसी की ज़ात को पहà¥à¤‚चता है। बंदे की इबादत से अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की शान में कोई इज़ाफ़ा नहीं होता और बंदे की नाफ़रमानी से उसकी बादशाही में कोई कमी नहीं आती। नेक अमल इंसान की अपनी नजात का ज़रिया है और गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ उसकी अपनी हलाकत का सबब।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ज़à¥à¤²à¥à¤® से पाक है। वह किसी बेगà¥à¤¨à¤¾à¤¹ को सज़ा नहीं देता और न ही किसी नेककार के सवाब में कमी फ़रमाता है। हर शख़à¥à¤¸ को उसके किठका पूरा-पूरा बदला अदà¥à¤² व इंसाफ़ के साथ दिया जाà¤à¤—ा।
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