कुरान - 41:46 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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مَّنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا فَلِنَفۡسِهِۦۖ وَمَنۡ أَسَآءَ فَعَلَيۡهَاۗ وَمَا رَبُّكَ بِظَلَّـٰمٖ لِّلۡعَبِيدِ

Transliteration: (Man 'amila salihan falinafsihee wa man asaaa'a fa'alaihaa; wamaa rabbuka bizallaamil lil 'abeed (End Juz 24))

जिसने नेक अमल किया, तो अपनी ही ज़ात के फ़ायदे के लिए किया [127], और जिसने बुराई की, तो उसका वबाल उसी पर है; और आपका रब बंदों पर रत्ती बराबर भी ज़ुल्म करने वाला नहीं है [128]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 46

जिसने नेक अमल किया, तो अपनी ही ज़ात के फ़ायदे के लिए किया [127], और जिसने बुराई की, तो उसका वबाल उसी पर है; और आपका रब बंदों पर रत्ती बराबर भी ज़ुल्म करने वाला नहीं है [128]।

[127] आमाल का बदला अपने ही नफ़्स के लिए

इंसान का हर अमल—ख़्वाह नेकी हो या बदी—उसका असल फ़ायदा या नुक़सान ख़ुद उसी की ज़ात को पहुंचता है। बंदे की इबादत से अल्लाह की शान में कोई इज़ाफ़ा नहीं होता और बंदे की नाफ़रमानी से उसकी बादशाही में कोई कमी नहीं आती। नेक अमल इंसान की अपनी नजात का ज़रिया है और गुनाह उसकी अपनी हलाकत का सबब।

[128] अल्लाह तआला का मुतलक़ अद्ल व इंसाफ़

अल्लाह तआला ज़ुल्म से पाक है। वह किसी बेगुनाह को सज़ा नहीं देता और न ही किसी नेककार के सवाब में कमी फ़रमाता है। हर शख़्स को उसके किए का पूरा-पूरा बदला अद्ल व इंसाफ़ के साथ दिया जाएगा।

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