कुरान - 41:43 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
مَّا يُقَالُ لَكَ إِلَّا مَا قَدۡ قِيلَ لِلرُّسُلِ مِن قَبۡلِكَۚ إِنَّ رَبَّكَ لَذُو مَغۡفِرَةٖ وَذُو عِقَابٍ أَلِيمٖ

Transliteration: (Maa yuqaalu laka illaa maa qad qeela lir Rusuli min qablik; inna Rabbaka lazoo maghfiratinw wa zoo 'iqaabin aleem)

आपसे वही बात कही जा रही है जो आपसे पहले के रसूलों से कही गई थी [115]; बेशक आपका रब बड़ी मग़फ़िरत वाला है और दर्दनाक सज़ा देने वाला भी है [116]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 43

आपसे वही बात कही जा रही है जो आपसे पहले के रसूलों से कही गई थी [115]; बेशक आपका रब बड़ी मग़फ़िरत वाला है और दर्दनाक सज़ा देने वाला भी है [116]।

[115] हुज़ूर ﷺ को तसल्ली-ए-क़ल्ब

काफ़िरों के बेबुनियाद एतराज़ात, तोहमतों और ईज़ा-रसानी पर अल्लाह तआला ने अपने महबूब को तसल्ली दी कि ऐ हबीब! ये मुशरिक़ीन जो तोहमतें आप पर लगाते हैं, ऐसी ही तोहमतें पिछली सरकश क़ौमों ने पिछले रसूलों पर भी लगाई थीं। यह राह-ए-हक़ की पुरानी आज़माइश है जिसमें हमेशा हक़ ही को फ़तह हासिल हुई।

[116] रहमत व इंसाफ़ का तवाज़ुन

अल्लाह तआला तौबा करने वाले मोमिनों के लिए इंतिहाई बख़्शिश व मग़फ़िरत वाला है, और हठधर्मी पर अड़े रहने वाले काफ़िरों और ज़ालिमों के लिए इंतिहाई दर्दनाक सज़ा देने वाला है।

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