Transliteration: (Laa yaateehil baatilu mim baini yadaihi wa laa min khalfihee tanzeelum min Hakeemin Hameed)
बातिल इसके पास न इसके आगे से आ सकता है [113] और न इसके पीछे से [114]; यह उस ज़ात की तरफ़ से नाज़िल शà¥à¤¦à¤¾ है जो बड़ी हिकमत वाली, तमाम तारीफ़ों की मालिक (हकीम व हमीद) है।
क़à¥à¤°à¤†à¤¨ मजीद à¤à¤¸à¥€ मà¥à¤•़दà¥à¤¦à¤¸ किताब है जिसमें किसी à¤à¥€ तरफ़ से बातिल दाखिल नहीं हो सकता—न इसमें कोई लफ़à¥à¤œà¤¼ बढ़ाया जा सकता है और न घटाया जा सकता है। इससे साबित होता है कि सहाबा-à¤-किराम रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥à¤® सब के सब सादिक़, आदिल और अमानतदार थे जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस अमानत को बे-कम-ओ-कासà¥à¤¤ उमà¥à¤®à¤¤ तक पहà¥à¤‚चाया।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने इसके अलà¥à¤«à¤¼à¤¾à¤œà¤¼ की हिफ़ाज़त के लिठहà¥à¤«à¤¼à¥à¤«à¤¼à¤¾à¤œà¤¼ व क़à¥à¤°à¥à¤°à¤¾ मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° फ़रमाà¤, इसके मआनी व अहकाम की हिफ़ाज़त के लिठउलमा-à¤-मà¥à¤œà¥à¤¤à¤¹à¤¿à¤¦à¥€à¤¨, और इसके बातिनी असà¥à¤°à¤¾à¤° व रूहानियत की हिफ़ाज़त के लिठऔलिया-à¤-इज़ाम मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° फ़रमाà¤à¥¤ क़यामत तक कोई बददीन इसमें रदà¥à¤¦à¥‹à¤¬à¤¦à¤² नहीं कर सकता।
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