कुरान - 41:42 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
لَّا يَأۡتِيهِ ٱلۡبَٰطِلُ مِنۢ بَيۡنِ يَدَيۡهِ وَلَا مِنۡ خَلۡفِهِۦۖ تَنزِيلٞ مِّنۡ حَكِيمٍ حَمِيدٖ

Transliteration: (Laa yaateehil baatilu mim baini yadaihi wa laa min khalfihee tanzeelum min Hakeemin Hameed)

बातिल इसके पास न इसके आगे से आ सकता है [113] और न इसके पीछे से [114]; यह उस ज़ात की तरफ़ से नाज़िल शुदा है जो बड़ी हिकमत वाली, तमाम तारीफ़ों की मालिक (हकीम व हमीद) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 42

बातिल इसके पास न इसके आगे से आ सकता है [113] और न इसके पीछे से [114]; यह उस ज़ात की तरफ़ से नाज़िल शुदा है जो बड़ी हिकमत वाली, तमाम तारीफ़ों की मालिक (हकीम व हमीद) है।

[113] क़ुरआन करीम की मुकम्मल हिफ़ाज़त

क़ुरआन मजीद ऐसी मुक़द्दस किताब है जिसमें किसी भी तरफ़ से बातिल दाखिल नहीं हो सकता—न इसमें कोई लफ़्ज़ बढ़ाया जा सकता है और न घटाया जा सकता है। इससे साबित होता है कि सहाबा-ए-किराम रज़ियल्लाहु अन्हुम सब के सब सादिक़, आदिल और अमानतदार थे जिन्होंने इस अमानत को बे-कम-ओ-कास्त उम्मत तक पहुंचाया।

[114] हर ज़माने में हिफ़ाज़त-ए-इलाही का निज़ाम

अल्लाह तआला ने इसके अल्फ़ाज़ की हिफ़ाज़त के लिए हुफ़्फ़ाज़ व क़ुर्रा मुक़र्रर फ़रमाए, इसके मआनी व अहकाम की हिफ़ाज़त के लिए उलमा-ए-मुज्तहिदीन, और इसके बातिनी अस्रार व रूहानियत की हिफ़ाज़त के लिए औलिया-ए-इज़ाम मुक़र्रर फ़रमाए। क़यामत तक कोई बददीन इसमें रद्दोबदल नहीं कर सकता।

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