कुरान - 41:40 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
إِنَّ ٱلَّذِينَ يُلۡحِدُونَ فِيٓ ءَايَٰتِنَا لَا يَخۡفَوۡنَ عَلَيۡنَآۗ أَفَمَن يُلۡقَىٰ فِي ٱلنَّارِ خَيۡرٌ أَم مَّن يَأۡتِيٓ ءَامِنٗا يَوۡمَ ٱلۡقِيَٰمَةِۚ ٱعۡمَلُواْ مَا شِئۡتُمۡ إِنَّهُۥ بِمَا تَعۡمَلُونَ بَصِيرٌ

Transliteration: (Innal lazeena yulhidoona feee Aayaatina laa yakhfawna 'alainaa' afamai yulqaa fin Naari khayrun am mai yaateee aaminai Yawmal Qiyaamah; i'maloo ma shi'tum innahoo bimaa ta'maloona Baseer)

बेशक जो लोग हमारी आयतों में कज-रविशी (टेढ़ापन) इख़्तियार करते हैं [105], वे हमसे छुपे हुए नहीं हैं; तो क्या वह शख़्स जो आग में डाला जाएगा बेहतर है [106] या वह जो क़ियामत के दिन अमन के साथ आएगा [107]? तुम जो चाहो अमल करते रहो [108]; बेशक वह तुम्हारे आमाल को ख़ूब देख रहा है [109]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 40

बेशक जो लोग हमारी आयतों में कज-रविशी (टेढ़ापन) इख़्तियार करते हैं [105], वे हमसे छुपे हुए नहीं हैं; तो क्या वह शख़्स जो आग में डाला जाएगा बेहतर है [106] या वह जो क़ियामत के दिन अमन के साथ आएगा [107]? तुम जो चाहो अमल करते रहो [108]; बेशक वह तुम्हारे आमाल को ख़ूब देख रहा है [109]।

[105] क़ुरआनी आयतों में तहरीफ़ और कज-रविशी

'इलहाद' और कज-रविशी से मुराद क़ुरआनी आयतों के सही मफ़हूम से हट कर बातिल तावीलें करना, उनके मआनी को बदलना या उनका मज़ाक़ उड़ाना है, जैसा कि बाज़ गुमराह फ़िरक़ों और क़ादियानियों ने किया। अल्लाह तआला उनकी इन तमाम साज़िशों से बाख़बर है।

[106] जहन्नम में औंधे मुंह गिराए जाने वाले

इससे मुराद काफ़िर और मुनकिर हैं जिन्हें ज़िल्लत के साथ जहन्नम की भड़कती हुई आग में झोंक दिया जाएगा।

[107] क़यामत के ख़ौफ़ से महफ़ूज़ अहले-ईमान

इसके मुक़ाबले में सच्चे मोमिनीन और सालेहीन मैदान-ए-हश्र में हर ख़ौफ़, घबराहट और अज़ाब से महफ़ूज़ व मामून होकर शाद व आबाद आएंगे।

[108] वईद और ग़ज़ब का अंदाज़

'जो चाहो करो' यह इजाज़त नहीं बल्कि सख़्त तंबीह और धमकी है कि जितनी सरकशी करनी है कर लो, बहुत जल्द तुम्हें अपने किए का मज़ा चखना होगा।

[109] बसीर की नज़र से कोई अमल ओझल नहीं

अल्लाह तआला बंदों के हर ज़ाहिर व बातिन अमल को देख रहा है और उसी के मुताबिक़ मुकम्मल जज़ा व सज़ा फ़रमाएगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now