Transliteration: (Innal lazeena yulhidoona feee Aayaatina laa yakhfawna 'alainaa' afamai yulqaa fin Naari khayrun am mai yaateee aaminai Yawmal Qiyaamah; i'maloo ma shi'tum innahoo bimaa ta'maloona Baseer)
बेशक जो लोग हमारी आयतों में कज-रविशी (टेढ़ापन) इख़à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤° करते हैं [105], वे हमसे छà¥à¤ªà¥‡ हà¥à¤ नहीं हैं; तो कà¥à¤¯à¤¾ वह शख़à¥à¤¸ जो आग में डाला जाà¤à¤—ा बेहतर है [106] या वह जो क़ियामत के दिन अमन के साथ आà¤à¤—ा [107]? तà¥à¤® जो चाहो अमल करते रहो [108]; बेशक वह तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ आमाल को ख़ूब देख रहा है [109]।
'इलहाद' और कज-रविशी से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ क़à¥à¤°à¤†à¤¨à¥€ आयतों के सही मफ़हूम से हट कर बातिल तावीलें करना, उनके मआनी को बदलना या उनका मज़ाक़ उड़ाना है, जैसा कि बाज़ गà¥à¤®à¤°à¤¾à¤¹ फ़िरक़ों और क़ादियानियों ने किया। अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उनकी इन तमाम साज़िशों से बाख़बर है।
इससे मà¥à¤°à¤¾à¤¦ काफ़िर और मà¥à¤¨à¤•िर हैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ ज़िलà¥à¤²à¤¤ के साथ जहनà¥à¤¨à¤® की à¤à¤¡à¤¼à¤•ती हà¥à¤ˆ आग में à¤à¥‹à¤‚क दिया जाà¤à¤—ा।
इसके मà¥à¤•़ाबले में सचà¥à¤šà¥‡ मोमिनीन और सालेहीन मैदान-à¤-हशà¥à¤° में हर ख़ौफ़, घबराहट और अज़ाब से महफ़ूज़ व मामून होकर शाद व आबाद आà¤à¤‚गे।
'जो चाहो करो' यह इजाज़त नहीं बलà¥à¤•ि सख़à¥à¤¤ तंबीह और धमकी है कि जितनी सरकशी करनी है कर लो, बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने किठका मज़ा चखना होगा।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला बंदों के हर ज़ाहिर व बातिन अमल को देख रहा है और उसी के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² जज़ा व सज़ा फ़रमाà¤à¤—ा।
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