कुरान - 41:39 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَمِنۡ ءَايَٰتِهِۦٓ أَنَّكَ تَرَى ٱلۡأَرۡضَ خَٰشِعَةٗ فَإِذَآ أَنزَلۡنَا عَلَيۡهَا ٱلۡمَآءَ ٱهۡتَزَّتۡ وَرَبَتۡۚ إِنَّ ٱلَّذِيٓ أَحۡيَاهَا لَمُحۡيِ ٱلۡمَوۡتَىٰٓۚ إِنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٌ

Transliteration: (Wa min Aayaatiheee annaka taral arda khaashi'atan fa izaaa anzalna 'alaihal maaa'ah tazzat wa rabat; innal lazeee ahyaahaa lamuhiyil mawtaa; innahoo 'alaa kulli shai-in Qadeer)

और उसकी निशानियों में से यह है कि आप ज़मीन को सूखी, दबी हुई देखते हैं [104]; फिर जब हम उस पर पानी बरसाते हैं, तो वह लहलहा उठती है और उभर आती है; बेशक जिसने उसे ज़िंदा किया, वही मुर्दों को भी ज़िंदा फ़रमाने वाला है; बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 39

और उसकी निशानियों में से यह है कि आप ज़मीन को सूखी, दबी हुई देखते हैं [104]; फिर जब हम उस पर पानी बरसाते हैं, तो वह लहलहा उठती है और उभर आती है; बेशक जिसने उसे ज़िंदा किया, वही मुर्दों को भी ज़िंदा फ़रमाने वाला है; बेशक वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

[104] मुर्दा ज़मीन के ज़िंदा होने में बाइस-ए-हश्र की दलील

अल्लाह तआला ने दोबारा ज़िंदा किए जाने (हश्र व नश्र) की कितनी रौशन और मुशाहिदाती दलील पेश फ़रमाई कि जिस तरह सूखी, बंजर और मुर्दा ज़मीन बारिश का पानी पाते ही हरी-भरी होकर लहलहा उठती है और उसमें ज़िंदगी की लहर दौड़ जाती है, ठीक उसी तरह क़यामत के दिन अल्लाह तआला ख़ाक में मिले हुए इंसानी अज्ज़ा को दोबारा ज़िंदा फ़रमा कर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगा।

साथ ही इसमें रूहानी हिकमत भी है कि जिस दिल पर वही-ए-इलाही और सुन्नत-ए-रसूल की बारिश नहीं बरसती वह मुर्दा ज़मीन की तरह बेजान और बेफ़ैज़ रहता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now