Transliteration: (Wa min Aayaatihil lailu wannahaaru washshamsu walqamar; laa tasjudoo lishshamsi wa laa lilqamari wasjudoo lillaahil lazee khala qahunna in kuntum iyyaahu ta'budoon)
और उसकी निशानियों में से रात और दिन और सूरज और चांद हैं [97]; तà¥à¤® न सूरज को सजदा करो और न चांद को [98], बलà¥à¤•ि उस अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ को सजदा करो जिसने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पैदा किया [99], अगर तà¥à¤® ख़ालिस उसी की इबादत करते हो [100]। (सजदा)
रात और दिन का मà¥à¤¸à¤²à¤¸à¤² à¤à¤• दूसरे के पीछे आना-जाना, और सूरज व चांद का à¤à¤• मà¥à¤…यà¥à¤¯à¤¨ निज़ाम के तहत चमकना अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की क़à¥à¤¦à¤°à¤¤-à¤-कामिला और हिकमत-à¤-बालेग़ा की अज़ीम निशानियां हैं। जब ये बड़ी-बड़ी मख़à¥à¤²à¥‚क़ात ज़वाल और तबà¥à¤¦à¥€à¤²à¥€ के ताबे हैं, तो ये माबूद कैसे हो सकती हैं!
क़दीम ज़माने से मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•़ीन सूरज और चांद की परसà¥à¤¤à¤¿à¤¶ करते आठहैं। क़à¥à¤°à¤†à¤¨ करीम ने इस शिरà¥à¤• का क़लअ-क़मा फ़रमा दिया कि सजदा-à¤-इबादत अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के सिवा किसी के लिठजाà¤à¤œà¤¼ नहीं। मख़à¥à¤²à¥‚क़ की इबादत सरासर गà¥à¤®à¤°à¤¾à¤¹à¥€ और कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° है।
इबादत और सजदा सिरà¥à¤«à¤¼ उसी ज़ात-à¤-पाक का हक़ है जिसने इन तमाम अफ़à¥à¤²à¤¾à¤•ी अजà¥à¤°à¤¾à¤® को अदम से वजूद बख़à¥à¤¶à¤¾ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ निज़ाम का पाबंद बनाया।
तमाम इबादतों में नमाज़ सबसे आला इबादत है और नमाज़ में सजदा बंदे की आजीज़ी और कà¥à¤°à¥à¤¬-à¤-इलाही का मेअराज है। हदीस शरीफ़ में है कि बंदा सजदे की हालत में अपने रब के सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ क़रीब होता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat