कुरान - 41:35 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَمَا يُلَقَّىٰهَآ إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُواْ وَمَا يُلَقَّىٰهَآ إِلَّا ذُو حَظٍّ عَظِيمٖ

Transliteration: (Wa maa yulaqqaahaaa illal lazeena sabaroo wa maa yulaqqaahaaa illaa zoo hazzin 'azeem)

और यह बात सिर्फ़ उन्हीं को हासिल होती है जो सब्र करते हैं [94], और यह मक़ाम सिर्फ़ उसी को मिलता है जो बड़े नसीब वाला हो [95]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 35

और यह बात सिर्फ़ उन्हीं को हासिल होती है जो सब्र करते हैं [94], और यह मक़ाम सिर्फ़ उसी को मिलता है जो बड़े नसीब वाला हो [95]।

[94] सब्र और ज़ब्त-ए-नफ़्स की अज़ीम सिफ़त

बुराई का जवाब भलाई से देना और इंतिक़ाम की ताक़त रखने के बावजूद माफ़ कर देना इंतिहाई मुश्किल और आला मर्तबा है। यह सिफ़त सिर्फ़ उन्हीं कामिल बंदों को नसीब होती है जो अपने नफ़्स पर क़ाबू रखते हैं और अल्लाह की रज़ा के लिए हर तल्ख़ी को सब्र के साथ बर्दाश्त करते हैं।

[95] अज़ीम क़िस्मत और रूहानी कमाल

दुनियावी दौलत तो हर किसी को मिल सकती है, मगर अख़लाक़-ए-फ़ाज़िला, अफ़्व व दरगुज़र और सब्र-ए-जमील का यह मक़ाम सिर्फ़ उन्हीं को अता होता है जिन्हें अल्लाह तआला ने आख़िरत की अज़ीम सआदत और बुलंद नसीब से नवाज़ा हो।

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