कुरान - 41:36 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ ٱلشَّيۡطَٰنِ نَزۡغٞ فَٱسۡتَعِذۡ بِٱللَّهِۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Wa immaa yanzaghannaka minash Shaitaani nazghun fasta'iz billaahi innahoo Huwas Samee'ul 'Aleem)

और अगर शैतान की तरफ़ से कोई उकसावा (वसवसा) आपको आए [96], तो अल्लाह की पनाह मांग लीजिए; बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 36

और अगर शैतान की तरफ़ से कोई उकसावा (वसवसा) आपको आए [96], तो अल्लाह की पनाह मांग लीजिए; बेशक वही सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

[96] शैतानी वसाविस का इलाज: इस्तिआज़ा

जब कभी नफ़्स में ग़ुस्सा भड़के, इंतिक़ाम का जज़्बा पैदा हो या नेकी के रास्ते में कोई शैतानी रुकावट महसूस हो, तो फ़ौरन 'अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम' पढ़ कर अल्लाह तआला की पनाह मांगनी चाहिए। अल्लाह तआला हर बंदे की फ़रियाद को सुनता है और दिलों के भेदों और शैतान के मक्र व फ़रेब को ख़ूब जानता है। अल्लाह की पनाह ही शैतान के वार से हिफ़ाज़त का मज़बूत क़िला है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now