कुरान - 41:38 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
فَإِنِ ٱسۡتَكۡبَرُواْ فَٱلَّذِينَ عِندَ رَبِّكَ يُسَبِّحُونَ لَهُۥ بِٱلَّيۡلِ وَٱلنَّهَارِ وَهُمۡ لَا يَسۡـَٔمُونَ۩

Transliteration: (Fa inis-takbaroo fallazee na 'inda Rabbika yusabbihoona lahoo billaili wannnahaari wa hum laa yas'amoon (make sajda))

फिर अगर वे तकब्बुर करें [101], तो जो (फ़रिश्ते) आपके रब के पास हैं [102] वे रात और दिन उसकी तस्बीह करते हैं और वे कभी नहीं थकते [103]! (सजदा-ए-तिलावत) (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 38

फिर अगर वे तकब्बुर करें [101], तो जो (फ़रिश्ते) आपके रब के पास हैं [102] वे रात और दिन उसकी तस्बीह करते हैं और वे कभी नहीं थकते [103]! (सजदा-ए-तिलावत)

[101] मुनकिरीन का इबादत से तकब्बुर

अगर ये मुशरिक़ीन अपने तकब्बुर और हठधर्मी की वजह से अल्लाह के हुज़ूर सजदारिज़ होने और इबादत करने से मुंह मोड़ते हैं, तो अल्लाह तआला को उनकी इबादत की कोई परवाह और हाजत नहीं।

[102] मुक़र्रब फ़रिश्तों का मक़ामे कुर्ब

अल्लाह तआला के पास रहने से मुराद जिस्मानी या मकानी क़ुर्बत नहीं (क्योंकि अल्लाह तआला मकान और ज़मान से पाक है), बल्कि इसका मतलब रूहानी दर्जा, मर्तबा और क़ुर्ब-ए-ख़ास है।

[103] फ़रिश्तों की बे-थकान मुसलसल इबादत

लाखों-करोड़ों मुक़र्रब फ़रिश्ते हर लम्हा दिन-रात अल्लाह की हम्द व सना और तस्बीह व तहलील में मसरूफ़ हैं। बाज़ फ़रिश्ते पैदाइश से क़यामत तक रुकू में हैं, बाज़ सजदे में हैं, और वे कभी भी नहीं उकताते और न थकते हैं। इंसान की नाफ़रमानी से अल्लाह की बादशाही में कोई कमी नहीं आ सकती। (इस आयत की तिलावत या सुनने पर सजदा-ए-तिलावत वाजिब होता है)।

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