कुरान - 41:33 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَمَنۡ أَحۡسَنُ قَوۡلٗا مِّمَّن دَعَآ إِلَى ٱللَّهِ وَعَمِلَ صَٰلِحٗا وَقَالَ إِنَّنِي مِنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ

Transliteration: (Wa man ahsanu qawlam mimman da'aaa ilal laahi wa 'amila saalihanw wa qaala innanee minal muslimeen)

और उस शख़्स से बेहतर किसकी बात हो सकती है जिसने अल्लाह की तरफ़ बुलाया [88] और नेक अमल किया [89] और कहा: बेशक मैं फ़रमांबरदारों (मुसलमानों) में से हूं [90]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 33

और उस शख़्स से बेहतर किसकी बात हो सकती है जिसने अल्लाह की तरफ़ बुलाया [88] और नेक अमल किया [89] और कहा: बेशक मैं फ़रमांबरदारों (मुसलमानों) में से हूं [90]?

[88] दावत-ए-हक़ और तब्लीग़े दीन का आला मर्तबा

दुनिया में सबसे बेहतरीन और मुअज़्ज़ज़ गुफ़्तगू उस शख़्स की है जो बंदगान-ए-ख़ुदा को अल्लाह तआला की तौहीद, इबादत और अताअत की तरफ़ बुलाता है। इस मक़ाम के सबसे आला मिस्दाक़ हुज़ूर सैयदे आलम सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हैं, फिर अंबिया-ए-किराम, और उनके बाद उलमा-ए-हक़ और मुअज़्ज़िन जो अज़ान के ज़रिए लोगों को नमाज़ की तरफ़ बुलाते हैं।

[89] क़ौल के साथ अमल का हुस्न

सिर्फ़ ज़बानी दावत काफ़ी नहीं, बल्कि सच्चा दाई वह है जिसका अपना अमल भी नेक और पाकीज़ा हो। जो दूसरों को नेकी का हुक्म दे और ख़ुद भी उस पर अमल पैरा हो, उसकी बात दिलों में असर करती है।

[90] इस्लाम पर फ़ख़्र और फ़रमांबरदारी का इज़हार

यह कहना कि 'मैं मुसलमानों में से हूं' आजीज़ी के साथ-साथ दीने इस्लाम पर फ़ख़्र और साबित-क़दमी का इज़हार है कि इंसान हर हाल में अपनी इस्लामी शनाख़्त पर क़ाइम रहे और किसी बातिल ताक़त से मरऊब न हो।

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