कुरान - 41:32 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
نُزُلٗا مِّنۡ غَفُورٖ رَّحِيمٖ

Transliteration: (Nuzulam min Ghafoorir Raheem (section 4))

मेहमानी के तौर पर [87], बड़े बख़्शने वाले, निहायत रहम फ़रमाने वाले की तरफ़ से। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 32

मेहमानी के तौर पर [87], बड़े बख़्शने वाले, निहायत रहम फ़रमाने वाले की तरफ़ से।

[87] रब्बे करीम की तरफ़ से शाही मेहमानी

'नुज़ुल' उस मेहमानी और एज़ाज़ को कहते हैं जो किसी मुअज़्ज़ज़ मेहमान के इस्तिक़बाल में पेश की जाए। जन्नत में मोमिनों का दाख़िला सिर्फ़ उनके आमाल की उजरत नहीं बल्कि शहंशाहे कायनात की तरफ़ से शाही मेहमानी है।

यहां 'ग़फ़ूर' और 'रहीम' की सिफ़ात बयान फ़रमा कर जताया गया कि जन्नत का मिलना अल्लाह तआला की मफ़़िरत और उसकी बेपायां रहमत व फ़ज़्ल से है, सिर्फ़ बंदे के आमाल इसके लिए काफ़ी नहीं हो सकते।

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