Transliteration: (Innal lazeena qaaloo Rabbunal laahu summas taqaamoo tatanazzalu 'alaihimul malaaa 'ikatu allaa takhaafoo wa laa tahzanoo wa abshiroo bil Jannnatil latee kuntum too'adoon)
बेशक जिन लोगों ने कहा: 'हमारा रब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ है' [79], फिर वे उस पर साबित-क़दम रहे [80], उन पर फ़रिशà¥à¤¤à¥‡ उतरते हैं [81] (और कहते हैं:) न तà¥à¤® डरो और न ग़म करो [82], और उस जनà¥à¤¨à¤¤ की ख़à¥à¤¶à¤–़बरी से शादमान हो जाओ जिसका तà¥à¤®à¤¸à¥‡ वादा किया जाता था [83]!
यह कहना कि 'हमारा रब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ है' सिरà¥à¤«à¤¼ ज़बानी दावा नहीं बलà¥à¤•ि तमाम अंबिया की तालीमात और उनके हà¥à¤•़ूक़ को दिल व जान से तसà¥à¤²à¥€à¤® करना है। जो अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ को अपना मालिक व रब मानता है, वह उसकी रज़ा में राज़ी रहता है, नेअमत पर शà¥à¤•à¥à¤° और मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ पर सबà¥à¤° करता है।
इसà¥à¤¤à¤•़ामत यह है कि इंसान ज़िंदगी के हर मोड़ पर—ख़à¥à¤¶à¥€ हो या ग़म, फ़क़à¥à¤° हो या तवंगरी—दीने हक़ और सà¥à¤¨à¥à¤¨à¤¤-à¤-रसूल पर जमा रहे और दम-à¤-वापसीं तक अपने अक़ीदे में कोई तबà¥à¤¦à¥€à¤²à¥€ न आने दे। हज़रत अबू बकà¥à¤° सिदà¥à¤¦à¥€à¤•़ रज़ियलà¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अनà¥à¤¹à¥ ने फ़रमाया: 'इसà¥à¤¤à¤•़ामत यह है कि अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के साथ किसी को शरीक न ठहराया जाठऔर नेक आमाल पर साबित-क़दमी इख़à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤° की जाà¤à¥¤'
जब मोमिन का आख़िरी वक़à¥à¤¤ आता है, तो रहमत के फ़रिशà¥à¤¤à¥‡ नूरानी सूरतों और जनà¥à¤¨à¤¤ के फूलों के साथ नाज़िल होते हैं और बंदा-à¤-मोमिन के दिल को तसà¥à¤•ीन व सà¥à¤•ून (सकीना) अता फ़रमाते हैं।
फ़रिशà¥à¤¤à¥‡ बशारत देते हैं कि आने वाली मंज़िलों (क़बà¥à¤° व हशà¥à¤°) का कोई ख़ौफ़ न करो, और जो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में अहल-ओ-अयाल छोड़ आठहो उनका कोई ग़म न करो; अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¤¾ और तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ अहल-ओ-अयाल का निगहबान है।
उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जनà¥à¤¨à¤¤ की नेअमतों और दीदार-à¤-इलाही की ख़à¥à¤¶à¤–़बरी दी जाती है। यही वजह है कि औलिया-à¤-किराम के विसाल के दिन को 'उरà¥à¤¸' (शादी व विसाल की ख़à¥à¤¶à¥€) कहा जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह रब की रहमत से मà¥à¤²à¤¾à¤•़ात का दिन है।
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