कुरान - 41:31 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
نَحۡنُ أَوۡلِيَآؤُكُمۡ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَفِي ٱلۡأٓخِرَةِۖ وَلَكُمۡ فِيهَا مَا تَشۡتَهِيٓ أَنفُسُكُمۡ وَلَكُمۡ فِيهَا مَا تَدَّعُونَ

Transliteration: (Nahnu awliyaaa'ukum fil hayaatid dunyaa wa fil Aakhirati wa lakum feehaa maa tashtaheee anfusukum wa lakum feehaa ma tadda'oon)

हम दुनियावी ज़िंदगी में भी तुम्हारे साथी (मददगार) हैं और आख़िरत में भी [84]; और तुम्हारे लिए उसमें वह सब कुछ है जिसकी तुम्हारी जानें ख़्वाहिश करेंगी [85], और तुम्हारे लिए उसमें वह सब कुछ मौजूद है जो तुम मांगोगे [86]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 31

हम दुनियावी ज़िंदगी में भी तुम्हारे साथी (मददगार) हैं और आख़िरत में भी [84]; और तुम्हारे लिए उसमें वह सब कुछ है जिसकी तुम्हारी जानें ख़्वाहिश करेंगी [85], और तुम्हारे लिए उसमें वह सब कुछ मौजूद है जो तुम मांगोगे [86];

[84] दुनिया व आख़िरत में फ़रिश्तों और नेक बंदों की नुसरत

फ़रिश्ते मोमिनीन से कहते हैं कि हम दुनिया में तुम्हारी हिफ़ाज़त करते थे, मौत के वक़्त तुम्हारे साथ हैं, क़ब्र में तुम्हारी तसल्ली का सबब बनेंगे और हश्र में तुम्हें इस्तिक़बाल करते हुए जन्नत ले जाएंगे। इससे यह साबित होता है कि अल्लाह के हुक्म से फ़रिश्तों, अंबिया और औलिया की मदद व नुसरत हक़ है और अल्लाह तआला अपने बंदों के ज़रिए भी अपने नेक बंदों की इमदाद फ़रमाता है।

[85] जन्नत में पाक दिल की हर तमन्ना की तकमील

जन्नत में मोमिन का नफ़्स गुनाहों से पाक हो चुका होगा, लिहाज़ा वहां उनके दिलों में जो भी पाकीज़ा ख़्वाहिश उभरेगी, वह फ़ौरन पूरी कर दी जाएगी। वहां कोई नागवार या ग़ैर-शरई ख़्वाहिश पैदा ही नहीं होगी।

[86] ज़बान से तलब की हुई हर नेअमत की फ़राहमी

दिल की ख़्वाहिश भी पूरी होगी और ज़बान से जो कुछ तलब करेंगे, वह भी पेश कर दिया जाएगा। यह अल्लाह तआला के बेमिसाल लुत्फ़ व करम और नेअमतों की बेपायां फ़रावानी का बयान है।

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