Transliteration: (Laa yas'amul insaanu min du'aaa'il khairi wa im massa hush sharru fa ya'oosun qanoot)
इंसान à¤à¤²à¤¾à¤ˆ (दौलत व राहत) मांगने से नहीं थकता [135], और अगर उसे कोई तकलीफ़ छू जाà¤, तो वह निहायत ना-उमà¥à¤®à¥€à¤¦, बे-आसरा हो जाता है [136]!
यहां 'इंसान' से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ काफ़िर या ग़ाफ़िल इंसान है जो दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ नेअमतों, सेहत और माल व दौलत की तलब में कà¤à¥€ नहीं थकता और उसकी हिरà¥à¤¸ कà¤à¥€ ख़तà¥à¤® नहीं होती। मोमिन दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ माल पर नहीं बलà¥à¤•ि रब की रज़ा पर मà¥à¤¤à¤®à¤‡à¤¨ रहता है।
काफ़िर पर जब कोई आज़माइश, बीमारी या तंगदसà¥à¤¤à¥€ आती है, तो वह फ़ौरन मायूस होकर हौसला हार बैठता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उसके पास ईमान और सबà¥à¤° का सहारा नहीं होता। इसके बरअकà¥à¤¸ सचà¥à¤šà¤¾ मोमिन मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ में à¤à¥€ अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की रहमत से कà¤à¥€ ना-उमà¥à¤®à¥€à¤¦ नहीं होता।
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