कुरान - 41:50 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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وَلَئِنۡ أَذَقۡنَٰهُ رَحۡمَةٗ مِّنَّا مِنۢ بَعۡدِ ضَرَّآءَ مَسَّتۡهُ لَيَقُولَنَّ هَٰذَا لِي وَمَآ أَظُنُّ ٱلسَّاعَةَ قَآئِمَةٗ وَلَئِن رُّجِعۡتُ إِلَىٰ رَبِّيٓ إِنَّ لِي عِندَهُۥ لَلۡحُسۡنَىٰۚ فَلَنُنَبِّئَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِمَا عَمِلُواْ وَلَنُذِيقَنَّهُم مِّنۡ عَذَابٍ غَلِيظٖ

Transliteration: (Wa la in azaqnaahu rahmatam minnaa mim ba'di dar raaa'a massat hu la yaqoolanna haazaa lee wa maaa azunnus Saa'ata qaaa'imatanw wa la'in ruji'tu ilaa Rabbeee inna lee 'indahoo lalhusnaa; falanu nabbi'annal lazeena kafaroo bimaa 'amiloo wa lanuzeeqan nahum min 'azaabin ghaleez)

और अगर हम उसे उस तकलीफ़ के बाद जो उसे पहुंची थी अपनी तरफ़ से रहमत का मज़ा चखा दें [137], तो वह यक़ीनन कहेगा: यह तो मेरा हक़ है [138]! और मैं नहीं समझता कि क़ियामत क़ायम होगी; और अगर मैं अपने रब की तरफ़ लौटाया भी गया, तो यक़ीनन उसके पास मेरे लिए भलाई ही होगी [139]! पस हम काफ़िरों को उनके किए हुए आमाल से ज़रूर बा-ख़बर करेंगे [140] और उन्हें यक़ीनन सख़्त तरीन अज़ाब का मज़ा चखाएंगे [141]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 50

और अगर हम उसे उस तकलीफ़ के बाद जो उसे पहुंची थी अपनी तरफ़ से रहमत का मज़ा चखा दें [137], तो वह यक़ीनन कहेगा: यह तो मेरा हक़ है [138]! और मैं नहीं समझता कि क़ियामत क़ायम होगी; और अगर मैं अपने रब की तरफ़ लौटाया भी गया, तो यक़ीनन उसके पास मेरे लिए भलाई ही होगी [139]! पस हम काफ़िरों को उनके किए हुए आमाल से ज़रूर बा-ख़बर करेंगे [140] और उन्हें यक़ीनन सख़्त तरीन अज़ाब का मज़ा चखाएंगे [141]।

[137] मुसीबत के बाद रहमत और आसाइश

जब अल्लाह तआला किसी बंदे पर बीमारी या ग़रीबी के बाद सेहत और फ़राख़ी की रहमत फ़रमाता है, तो यह अल्लाह का फ़ज़्ल व एहसान होता है।

[138] नेअमत को अपनी ज़ाती लियाक़त समझना

मगर नाशुक्रा इंसान रब का शुक्र अदा करने के बजाए घमंड में आ जाता है और कहता है कि यह दौलत व इज़्ज़त तो मेरी अपनी अक़्ल और क़ाबिलियत का सिला है, जैसा कि क़ारून ने कहा था।

[139] आख़िरत का इन्कार और ख़ाम-ख़्याली

वह क़यामत का इन्कार करता है और अगर कभी ज़िक्र आ जाए तो घमंड से कहता है कि अगर आख़िरत हुई भी तो वहां भी मुझे यही ऐश व आराम मिलेगा। यह उसकी बदतरीन हिमाक़त है।

[140] आमाल की मुकम्मल बाज़पुर्स

अल्लाह तआला काफ़िरों और नाशुक्रों के एक-एक करतूत को उनके सामने ज़ाहिर फ़रमाएगा और उनका पूरा हिसाब लेगा।

[141] सख़्त और रुसवाकुन अज़ाब

उनका अंजाम जहन्नम का सख़्त तरीन दायमी अज़ाब है जिससे उन्हें कभी निजात नहीं मिलेगी।

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