Transliteration: (Wa la in azaqnaahu rahmatam minnaa mim ba'di dar raaa'a massat hu la yaqoolanna haazaa lee wa maaa azunnus Saa'ata qaaa'imatanw wa la'in ruji'tu ilaa Rabbeee inna lee 'indahoo lalhusnaa; falanu nabbi'annal lazeena kafaroo bimaa 'amiloo wa lanuzeeqan nahum min 'azaabin ghaleez)
और अगर हम उसे उस तकलीफ़ के बाद जो उसे पहà¥à¤‚ची थी अपनी तरफ़ से रहमत का मज़ा चखा दें [137], तो वह यक़ीनन कहेगा: यह तो मेरा हक़ है [138]! और मैं नहीं समà¤à¤¤à¤¾ कि क़ियामत क़ायम होगी; और अगर मैं अपने रब की तरफ़ लौटाया à¤à¥€ गया, तो यक़ीनन उसके पास मेरे लिठà¤à¤²à¤¾à¤ˆ ही होगी [139]! पस हम काफ़िरों को उनके किठहà¥à¤ आमाल से ज़रूर बा-ख़बर करेंगे [140] और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ यक़ीनन सख़à¥à¤¤ तरीन अज़ाब का मज़ा चखाà¤à¤‚गे [141]।
जब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला किसी बंदे पर बीमारी या ग़रीबी के बाद सेहत और फ़राख़ी की रहमत फ़रमाता है, तो यह अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का फ़ज़à¥à¤² व à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨ होता है।
मगर नाशà¥à¤•à¥à¤°à¤¾ इंसान रब का शà¥à¤•à¥à¤° अदा करने के बजाठघमंड में आ जाता है और कहता है कि यह दौलत व इज़à¥à¤œà¤¼à¤¤ तो मेरी अपनी अक़à¥à¤² और क़ाबिलियत का सिला है, जैसा कि क़ारून ने कहा था।
वह क़यामत का इनà¥à¤•ार करता है और अगर कà¤à¥€ ज़िकà¥à¤° आ जाठतो घमंड से कहता है कि अगर आख़िरत हà¥à¤ˆ à¤à¥€ तो वहां à¤à¥€ मà¥à¤à¥‡ यही à¤à¤¶ व आराम मिलेगा। यह उसकी बदतरीन हिमाक़त है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला काफ़िरों और नाशà¥à¤•à¥à¤°à¥‹à¤‚ के à¤à¤•-à¤à¤• करतूत को उनके सामने ज़ाहिर फ़रमाà¤à¤—ा और उनका पूरा हिसाब लेगा।
उनका अंजाम जहनà¥à¤¨à¤® का सख़à¥à¤¤ तरीन दायमी अज़ाब है जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कà¤à¥€ निजात नहीं मिलेगी।
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