Transliteration: (Wa izaaa an'amnaa 'alal insaani a'rada wa na-aa bijaani bihee wa izaa massahush sharru fazoo du'aaa'in 'areed)
और जब हम इंसान पर à¤à¤¹à¤¸à¤¾à¤¨ फ़रमाते हैं, तो वह मà¥à¤‚ह फेर लेता है और पहलू बचा कर दूर हट जाता है [142]; और जब उसे कोई तकलीफ़ पहà¥à¤‚चती है, तो वह लंबी-चौड़ी दà¥à¤†à¤à¤‚ करने वाला बन जाता है [143]!
जब इंसान पर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की नेअमतें और आसाइशें बरसती हैं, तो वह अपने ख़ालिक़ को à¤à¥à¤²à¤¾ कर तकबà¥à¤¬à¥à¤° के साथ मà¥à¤‚ह मोड़ लेता है और इबादत व बंदगी से पहलू-तही करता है।
और जब कोई मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ या तकलीफ़ आ घेरती है, तो गिड़गिड़ा कर लंबी-चौड़ी दà¥à¤†à¤à¤‚ मांगने लगता है। यहां दà¥à¤† की बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ नहीं बलà¥à¤•ि इंसान की मतलबी और नाशà¥à¤•à¥à¤° गà¥à¤œà¤¼à¤¾à¤° तबीयत की मज़मà¥à¤®à¤¤ बयान की गई है कि ख़à¥à¤¶à¥€ में रब को à¤à¥‚ल जाना और मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤ में ही याद करना सचà¥à¤šà¥‡ मोमिन की शान नहीं। सचà¥à¤šà¤¾ बंदा हर हाल में अपने रब का शà¥à¤•à¥à¤°à¤—à¥à¤œà¤¼à¤¾à¤° रहता है।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat