कुरान - 41:51 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَإِذَآ أَنۡعَمۡنَا عَلَى ٱلۡإِنسَٰنِ أَعۡرَضَ وَنَـَٔا بِجَانِبِهِۦ وَإِذَا مَسَّهُ ٱلشَّرُّ فَذُو دُعَآءٍ عَرِيضٖ

Transliteration: (Wa izaaa an'amnaa 'alal insaani a'rada wa na-aa bijaani bihee wa izaa massahush sharru fazoo du'aaa'in 'areed)

और जब हम इंसान पर एहसान फ़रमाते हैं, तो वह मुंह फेर लेता है और पहलू बचा कर दूर हट जाता है [142]; और जब उसे कोई तकलीफ़ पहुंचती है, तो वह लंबी-चौड़ी दुआएं करने वाला बन जाता है [143]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 51

और जब हम इंसान पर एहसान फ़रमाते हैं, तो वह मुंह फेर लेता है और पहलू बचा कर दूर हट जाता है [142]; और जब उसे कोई तकलीफ़ पहुंचती है, तो वह लंबी-चौड़ी दुआएं करने वाला बन जाता है [143]!

[142] नेअमत के वक़्त नाफ़रमानी और एराज़

जब इंसान पर अल्लाह तआला की नेअमतें और आसाइशें बरसती हैं, तो वह अपने ख़ालिक़ को भुला कर तकब्बुर के साथ मुंह मोड़ लेता है और इबादत व बंदगी से पहलू-तही करता है।

[143] मुसीबत के वक़्त मतलबी दुआएं

और जब कोई मुसीबत या तकलीफ़ आ घेरती है, तो गिड़गिड़ा कर लंबी-चौड़ी दुआएं मांगने लगता है। यहां दुआ की बुराई नहीं बल्कि इंसान की मतलबी और नाशुक्र गुज़ार तबीयत की मज़म्मत बयान की गई है कि ख़ुशी में रब को भूल जाना और मुसीबत में ही याद करना सच्चे मोमिन की शान नहीं। सच्चा बंदा हर हाल में अपने रब का शुक्रगुज़ार रहता है।

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