कुरान - 41:53 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
سَنُرِيهِمۡ ءَايَٰتِنَا فِي ٱلۡأٓفَاقِ وَفِيٓ أَنفُسِهِمۡ حَتَّىٰ يَتَبَيَّنَ لَهُمۡ أَنَّهُ ٱلۡحَقُّۗ أَوَلَمۡ يَكۡفِ بِرَبِّكَ أَنَّهُۥ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ شَهِيدٌ

Transliteration: (Sanureehim Aayaatinaa fil aafaaqi wa feee anfusihim hattaa yatabaiyana lahum annahul haqq; awa lam yakfi bi Rabbika annahoo 'alaa kulli shai-in Shaheed)

अनक़रीब हम उन्हें कायनात के अतराफ़ (आफ़ाक़) में [145] और उनके अपने वजूद (नुफ़ूस) में अपनी निशानियां दिखाएंगे [146], यहां तक कि उन पर पूरी तरह वाज़ेह हो जाएगा कि बेशक वही हक़ है [147]; क्या आपके रब का हर चीज़ पर गवाह होना काफ़ी नहीं है [148]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 53

अनक़रीब हम उन्हें कायनात के अतराफ़ (आफ़ाक़) में [145] और उनके अपने वजूद (नुफ़ूस) में अपनी निशानियां दिखाएंगे [146], यहां तक कि उन पर पूरी तरह वाज़ेह हो जाएगा कि बेशक वही हक़ है [147]; क्या आपके रब का हर चीज़ पर गवाह होना काफ़ी नहीं है [148]?

[145] आफ़ाक़ यानी कायनात की निशानियां

आफ़ाक़ी निशानियों से मुराद कायनात के अतराफ़ में अल्लाह तआला की क़ुदरत के मज़ाहिर हैं—सूरज, चांद, सितारे, मौसमों का बदलना, और मुसलमानों की फ़ुतूहात जैसे फ़तह-ए-मक्का और मुल्क-ए-शाम व फ़ारस का फ़तह होना जो क़ुरआन की पेशीनगोई के मुताबिक़ पूरा हुआ।

[146] नुफ़ूस यानी इंसानी वजूद के अंदरूनी अस्रार

इंसान के अपने जिस्म और रूह की तख़्लीक़—नुत्फ़े से इंसान का बनना, आजा व जवारिह की बेमिसाल बनावट, अक़्ल व फ़हम और रूहानी सलाहियतें—ख़ुद सानेअ-ए-हक़ीक़ी (अल्लाह) के वुजूद और तौहीद की अज़ीम दलील हैं। सूफ़ी-ए-किराम फ़रमाते हैं कि इंसान कायनात का ख़ुलासा है।

[147] हक़ का पूरी तरह रौशन होना

ये तमाम निशानियां साबित कर देंगी कि क़ुरआन करीम, इस्लाम और रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम की रिसालत सरासर हक़ व सदाक़त है।

[148] हर चीज़ पर अल्लाह की गवाही काफ़ी

अल्लाह तआला हर चीज़ का ख़ालिक़ और उस पर मुकम्मल शाहिद व निगहबान है। कायनात का हर ज़र्रा उसकी यकताई की गवाही दे रहा है, लिहाज़ा हक़ को पहचानने के लिए यह गवाही हर मोमिन के लिए काफ़ी है।

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