Transliteration: (Sanureehim Aayaatinaa fil aafaaqi wa feee anfusihim hattaa yatabaiyana lahum annahul haqq; awa lam yakfi bi Rabbika annahoo 'alaa kulli shai-in Shaheed)
अनक़रीब हम उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कायनात के अतराफ़ (आफ़ाक़) में [145] और उनके अपने वजूद (नà¥à¤«à¤¼à¥‚स) में अपनी निशानियां दिखाà¤à¤‚गे [146], यहां तक कि उन पर पूरी तरह वाज़ेह हो जाà¤à¤—ा कि बेशक वही हक़ है [147]; कà¥à¤¯à¤¾ आपके रब का हर चीज़ पर गवाह होना काफ़ी नहीं है [148]?
आफ़ाक़ी निशानियों से मà¥à¤°à¤¾à¤¦ कायनात के अतराफ़ में अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला की क़à¥à¤¦à¤°à¤¤ के मज़ाहिर हैं—सूरज, चांद, सितारे, मौसमों का बदलना, और मà¥à¤¸à¤²à¤®à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ की फ़à¥à¤¤à¥‚हात जैसे फ़तह-à¤-मकà¥à¤•ा और मà¥à¤²à¥à¤•-à¤-शाम व फ़ारस का फ़तह होना जो क़à¥à¤°à¤†à¤¨ की पेशीनगोई के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•़ पूरा हà¥à¤†à¥¤
इंसान के अपने जिसà¥à¤® और रूह की तख़à¥à¤²à¥€à¤•़—नà¥à¤¤à¥à¤«à¤¼à¥‡ से इंसान का बनना, आजा व जवारिह की बेमिसाल बनावट, अक़à¥à¤² व फ़हम और रूहानी सलाहियतें—ख़à¥à¤¦ सानेअ-à¤-हक़ीक़ी (अलà¥à¤²à¤¾à¤¹) के वà¥à¤œà¥‚द और तौहीद की अज़ीम दलील हैं। सूफ़ी-à¤-किराम फ़रमाते हैं कि इंसान कायनात का ख़à¥à¤²à¤¾à¤¸à¤¾ है।
ये तमाम निशानियां साबित कर देंगी कि क़à¥à¤°à¤†à¤¨ करीम, इसà¥à¤²à¤¾à¤® और रसूलà¥à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹ सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® की रिसालत सरासर हक़ व सदाक़त है।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला हर चीज़ का ख़ालिक़ और उस पर मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² शाहिद व निगहबान है। कायनात का हर ज़रà¥à¤°à¤¾ उसकी यकताई की गवाही दे रहा है, लिहाज़ा हक़ को पहचानने के लिठयह गवाही हर मोमिन के लिठकाफ़ी है।
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