कुरान - 41:9 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

9
۞قُلۡ أَئِنَّكُمۡ لَتَكۡفُرُونَ بِٱلَّذِي خَلَقَ ٱلۡأَرۡضَ فِي يَوۡمَيۡنِ وَتَجۡعَلُونَ لَهُۥٓ أَندَادٗاۚ ذَٰلِكَ رَبُّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Qul a'innakum latakfuroona billazee khalaqal arda fee yawmaini wa taj'aloona lahooo andaadaa; zaalika Rabbul 'aalameen)

आप फ़रमा दीजिए: क्या तुम सचमुच उस ज़ात का इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिनों में [17] पैदा फ़रमाया? और क्या तुम [18] उसके लिए शरीक [19] ठहराते हो? वही तो सारे जहानों का रब है [20]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 9 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 9

आप फ़रमा दीजिए: क्या तुम सचमुच उस ज़ात का इन्कार करते हो जिसने ज़मीन को दो दिनों में [17] पैदा फ़रमाया? और क्या तुम [18] उसके लिए शरीक [19] ठहराते हो? वही तो सारे जहानों का रब है [20]!

[17] ज़मीन की दो दिनों में पैदाइश

अल्लाह तआला ने ज़मीन को दो दिनों में पैदा फ़रमाया। उस वक़्त सूरज और चांद न थे, लिहाज़ा यहां 'दिन' से मुराद वक़्त की वह मिक़दार है जो दुनिया के एक दिन के बराबर होती है। मुफ़स्सिरीन के मुताबिक़ एक दिन ज़मीन के वुजूद में लाने के लिए और दूसरा दिन उसे फैलाने और हमवार करने के लिए मुक़र्रर था।

[18] रसूल के इन्कार से ख़ालिक़ का इन्कार

अरब के मुशरिक़ीन अल्लाह के वुजूद के मुनकिर न थे, मगर रसूलुल्लाह ﷺ की रिसालत और तौहीद का इन्कार करके वे अमलन ख़ालिक़-ए-कायनात की क़ुदरत व हिकमत के मुनकिर बन गए।

[19] अल्लाह के लिए शरीक ठहराने का बुतलान

अल्लाह तआला बेनियाज़ और मुतलक़ क़ुदरत वाला है। पत्थरों और बुतों को माबूद और मददगार समझना अल्लाह तआला की शान में सख़्त गुस्ताख़ी और शिर्क है, क्योंकि बेनियाज़ ज़ात को किसी मददगार की हाजत नहीं।

[20] रब्बुल आलमीन की यकताई

जब तमाम जहानों की परवरिश, तख़्लीक़ और निगहबानी सिर्फ़ अल्लाह तआला के दस्त-ए-क़ुदरत में है, तो कोई दूसरा इबादत या ख़ुदाई के लायक़ कैसे हो सकता है!

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