कुरान - 41:11 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰٓ إِلَى ٱلسَّمَآءِ وَهِيَ دُخَانٞ فَقَالَ لَهَا وَلِلۡأَرۡضِ ٱئۡتِيَا طَوۡعًا أَوۡ كَرۡهٗا قَالَتَآ أَتَيۡنَا طَآئِعِينَ

Transliteration: (Summas tawaaa ilas-samaaa'i wa hiya dukhaanun faqaala lahaa wa lil ardi'tiyaaa taw'an aw karhan qaalataaa atainaa taaa'i'een)

फिर वह आसमान की तरफ़ मुतवज्जेह हुआ और वह धुआं सा था [25], तो उसने उससे और ज़मीन से फ़रमाया: तुम दोनों (मेरे हुक्म के ताबेदार होकर) आओ [26], ख़ुशी से या नाख़ुशी से! उन दोनों ने अर्ज़ किया: हम ख़ुशी से फ़रमांबरदार होकर हाज़िर हैं [27]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 11

फिर वह आसमान की तरफ़ मुतवज्जेह हुआ और वह धुआं सा था [25], तो उसने उससे और ज़मीन से फ़रमाया: तुम दोनों (मेरे हुक्म के ताबेदार होकर) आओ [26], ख़ुशी से या नाख़ुशी से! उन दोनों ने अर्ज़ किया: हम ख़ुशी से फ़रमांबरदार होकर हाज़िर हैं [27]!

[25] आसमान की इब्तिदाई हालत यानी धुआं

ज़मीन के माद्दे की तख़्लीक़ के बाद अल्लाह तआला ने आसमान की तख़्लीक़ का इरादा फ़रमाया। उस वक़्त आसमान धुएं और भाप की शक्ल में था। रिवायत में आता है कि पानी पर झाग पैदा हुआ जहां अब मक्का मुअज़्ज़मा है, और उसी धुएं से अल्लाह तआला ने आसमानों की तख़्लीक़ फ़रमाई।

[26] ज़मीन व आसमान की शुऊर व समझ

अल्लाह तआला का ज़मीन और आसमान से फ़रमाना कि "ख़ुशी से आओ या नाख़ुशी से" यह साबित करता है कि कायनात की हर चीज़ में अल्लाह तआला ने समझ और शुऊर रखा है। वे अपने ख़ालिक़ के अहकाम को समझते हैं और उसकी ताबेदारी करते हैं। क़ुरआन में दूसरी जगह है कि मोमिन के इंतिक़ाल पर ज़मीन और आसमान रोते हैं।

[27] ख़ुशी से हुक्म-ए-इलाही की इताअत

ज़मीन और आसमान दोनों ने बारगाह-ए-इलाही में इंतिहाई ख़ुशी और इताअत-गुज़ारी के साथ अर्ज़ किया कि हम तेरे हुक्म के ताबेदार होकर हाज़िर हैं। कायनात का हर ज़र्रा अल्लाह तआला के क़ुदरत के आगे सजदारिज़ है।

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