कुरान - 41:12 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
فَقَضَىٰهُنَّ سَبۡعَ سَمَٰوَاتٖ فِي يَوۡمَيۡنِ وَأَوۡحَىٰ فِي كُلِّ سَمَآءٍ أَمۡرَهَاۚ وَزَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِمَصَٰبِيحَ وَحِفۡظٗاۚ ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ

Transliteration: (Faqadaahunna sab'a samaawaatin fee yawmaini wa awhaa fee kulli samaaa'in amarahaa; wa zaiyannassa maaa'ad dunyaa bimasaabeeha wa hifzaa; zaalika taqdeerul 'Azeezil 'Aleem)

पस उसने दो दिनों में उन्हें सात आसमान बना दिया [28] और हर आसमान में उसका काम वही कर दिया [29]; और हमने सबसे क़रीबी आसमान को चिराग़ों (सितारों) से सजाया [30] और उसकी पूरी हिफ़ाज़त फ़रमाई [31]; यह उस ज़बरदस्त (ग़ालिब), सब कुछ जानने वाले का मुक़र्रर किया हुआ निज़ाम है [32]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 12

पस उसने दो दिनों में उन्हें सात आसमान बना दिया [28] और हर आसमान में उसका काम वही कर दिया [29]; और हमने सबसे क़रीबी आसमान को चिराग़ों (सितारों) से सजाया [30] और उसकी पूरी हिफ़ाज़त फ़रमाई [31]; यह उस ज़बरदस्त (ग़ालिब), सब कुछ जानने वाले का मुक़र्रर किया हुआ निज़ाम है [32]।

[28] दो दिनों में सात आसमानों की तकमील

अल्लाह तआला ने सात आसमानों की तख़्लीक़ दो दिनों (जुमेरात और जुमा) में मुकम्मल फ़रमाई। इस तरह ज़मीन व आसमान की पूरी तख़्लीक़ छह (6) दिनों में तकमील को पहुंची। सनीचर (शनिवार) के दिन कोई तख़्लीक़ नहीं हुई, जिससे यहूदियों के इस बातिल गुमान की तरदीद हुई कि अल्लाह थक गया था; अल्लाह तआला हर क़िस्म की थकान और कमज़ोरी से पाक है।

[29] हर आसमान में फ़रिश्तों और निज़ाम की मुक़र्ररी

हर आसमान में अल्लाह तआला ने मख़्सूस काम और फ़रिश्तों की जमाअतें मुक़र्रर फ़रमाईं। बाज़ फ़रिश्ते क़याम में हैं, बाज़ रुकू में, बाज़ सजदे में और बाज़ क़ादा में। यही हैअतें नमाज़ में उम्मत-ए-मुहम्मदिया को अता फ़रमाई गईं। साथ ही हर आसमान में रोशनी, बारिश और अम्र-ए-इलाही के इंतिज़ामत मुक़र्रर किए गए।

[30] दुनियावी आसमान की सितारों से ज़ीनत

सबसे निचले यानी दुनिया के आसमान को अल्लाह तआला ने चमकते हुए सितारों से मुज़ैय्यन फ़रमाया ताकि रात की तारीकी में हुस्न व ज़ीनत और रहनुमाई का ज़रिया बनें।

[31] शयातीन से हिफ़ाज़त का निज़ाम

सितारे आसमान की हिफ़ाज़त का ज़रिया हैं कि जब सरकश शयातीन आसमान की तरफ़ चढ़कर फ़रिश्तों की बातें चुराने की कोशिश करते हैं, तो शहाब-ए-साक़िब (टूटे हुए तारे) अंगारे बन कर उन पर गिरते हैं और उन्हें भगा देते हैं। इसी तरह सहाबा-ए-किराम और उलमा-ए-हक़ ज़मीन के सितारे हैं जो उम्मत के ईमान की हिफ़ाज़त करते हैं।

[32] अज़ीज़ व अलीम की हिकमत-ए-काफ़िला

यह अज़ीम निज़ाम अल्लाह तआला के कमाल-ए-क़ुदरत (अज़ीज़) और बेमिसाल इल्म (अलीम) का मुज़ाहिरा है जिसकी हिकमतों का इहाता इंसानी अक़्ल नहीं कर सकती।

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