कुरान - 41:15 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

15
فَأَمَّا عَادٞ فَٱسۡتَكۡبَرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ بِغَيۡرِ ٱلۡحَقِّ وَقَالُواْ مَنۡ أَشَدُّ مِنَّا قُوَّةًۖ أَوَلَمۡ يَرَوۡاْ أَنَّ ٱللَّهَ ٱلَّذِي خَلَقَهُمۡ هُوَ أَشَدُّ مِنۡهُمۡ قُوَّةٗۖ وَكَانُواْ بِـَٔايَٰتِنَا يَجۡحَدُونَ

Transliteration: (Fa ammaa 'Aadun fastak baroo fil ardi bighairul haqqi wa qaaloo man ashaddu minnaa quwwatan awalam yaraw annal laahal lazee khalaqahum Huwa ashaddu minhum quwwatanw wa kaanoo bi Aayaatinaa yajhadoon)

पस जो आद थे [39], उन्होंने ज़मीन में नाहक़ तकब्बुर किया [40] और कहा: ताक़त में हमसे ज़्यादा ज़बरदस्त कौन है [41]? क्या उन्होंने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने उन्हें पैदा किया वह ताक़त में उनसे कहीं ज़्यादा ज़बरदस्त है [42]? और वे हमारी आयतों का इन्कार ही करते रहे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 15 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 15

पस जो आद थे [39], उन्होंने ज़मीन में नाहक़ तकब्बुर किया [40] और कहा: ताक़त में हमसे ज़्यादा ज़बरदस्त कौन है [41]? क्या उन्होंने नहीं देखा कि जिस अल्लाह ने उन्हें पैदा किया वह ताक़त में उनसे कहीं ज़्यादा ज़बरदस्त है [42]? और वे हमारी आयतों का इन्कार ही करते रहे।

[39] क़ौम-ए-आद का तआरुफ़

क़ौम-ए-आद अहक़ाफ़ (यमन और ओमान के दरमियान) में आबाद थी। हज़रत हूद अलैहिस्सलाम उनकी तरफ़ रसूल बनाकर भेजे गए थे। वे जिस्मानी क़द-ओ-क़ामत और ताक़त में बेमिसाल थे और बड़े-बड़े आलीशान महल और सुतून तामीर करते थे।

[40] नाहक़ तकब्बुर और सरकशी

अल्लाह तआला की दी हुई ताक़त और नेअमतों पर शुक्र बजा लाने के बजाए वे ज़मीन में फ़साद मचाने लगे और अल्लाह के बंदों पर ज़ुल्म व सितम ढाने लगे। किसी भी मख़्लूक़ के लिए तकब्बुर ज़ेब नहीं देता।

[41] अपनी ताक़त के धोखे में मुब्तिला

वे अपनी ताक़त के नशे में चूर होकर कहने लगे कि पूरी दुनिया में हमसे ज़्यादा ज़ोरआवर कौन है! उनका यह तकब्बुर उन्हें अपने ख़ालिक़ को भुला बैठा जिसने उन्हें यह ताक़त बख़्शी थी।

[42] अल्लाह की क़ुदरत सबसे अज़ीम व मुतलक़

क़ुरआन मजीद ने उनकी नादानी पर तंबीह फ़रमाई कि जिस ज़ात-ए-पाक ने तुम्हें अदम से वजूद बख़्शा और इतनी ताक़त अता की, क्या उसकी ताक़त और क़ुदरत तुम्हारी ताक़त से बेइंतिहा बढ़ कर नहीं है! मख़्लूक़ का ख़ालिक़ के मुक़ाबले में अपनी ताक़त पर इतराना बदतरीन हिमाक़त है।

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