Transliteration: (Fa arsalnaa 'alaihim reehan sarsaran feee ayyaamin nahisaatil linuzeeqahum 'azaabal khizyi fil hayaatid dunyaa wa la'azaabul Aakhirati akhzaa wa hum laa yunsaroon)
तो हमने उन पर नहूसत के दिनों में [44] à¤à¤• इंतिहाई तेज़ सरà¥à¤¦ आंधी à¤à¥‡à¤œà¥€ [43] ताकि हम उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤µà¥€ ज़िंदगी में रà¥à¤¸à¤µà¤¾à¤ˆ का अज़ाब चखा दें; और यक़ीनन आख़िरत का अज़ाब तो और à¤à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रà¥à¤¸à¤µà¤¾à¤•à¥à¤¨ है [45] और उनकी कोई मदद नहीं की जाà¤à¤—ी [46]!
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने क़ौम-à¤-आद पर à¤à¤¸à¥€ आंधी à¤à¥‡à¤œà¥€ जिसमें बारिश की à¤à¤• बूंद न थी, बलà¥à¤•ि वह इंतिहाई तेज़, कड़कड़ाती और सख़à¥à¤¤ ठंडी हवा थी। यह आंधी उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हवा में उठा-उठा कर ज़मीन पर पटकती थी जिससे उनके सर कट-कट कर खजूर के कटे हà¥à¤ तनों की तरह गिरते थे। अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला बड़ी से बड़ी सरकश क़ौम को à¤à¤• हवा के à¤à¥‹à¤‚के से हलाक फ़रमा देता है।
तफ़सीर रूहà¥à¤² मआनी में है कि यह अज़ाब 22 शवà¥à¤µà¤¾à¤² बà¥à¤§ के रोज़ शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤† और 29 शवà¥à¤µà¤¾à¤² बà¥à¤§ तक मà¥à¤¸à¤²à¤¸à¤² आठदिन और सात रातें जारी रहा। जिस दिन किसी क़ौम पर अज़ाब नाज़िल हो वह दिन उनके हक़ में मनहूस होता है। इसी तरह जिस दिन बंदा गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ करे और रब की नाफ़रमानी करे वह दिन उसके लिठमनहूस है।
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में तो वे हवा के थपेड़ों से ज़लील होकर हलाक हà¥à¤, लेकिन आख़िरत का अज़ाब इससे कहीं ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ज़िलà¥à¤²à¤¤-आमेज़ और दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• होगा जो कà¤à¥€ ख़तà¥à¤® न होगा।
काफ़िरों का कोई मददगार, हामी या सिफ़ारिशी नहीं होगा। दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ में जिन बà¥à¤¤à¥‹à¤‚ और सरदारों पर वे नाज़ करते थे, वे सब वहां बेबस होंगे।
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