कुरान - 41:16 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
فَأَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمۡ رِيحٗا صَرۡصَرٗا فِيٓ أَيَّامٖ نَّحِسَاتٖ لِّنُذِيقَهُمۡ عَذَابَ ٱلۡخِزۡيِ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَلَعَذَابُ ٱلۡأٓخِرَةِ أَخۡزَىٰۖ وَهُمۡ لَا يُنصَرُونَ

Transliteration: (Fa arsalnaa 'alaihim reehan sarsaran feee ayyaamin nahisaatil linuzeeqahum 'azaabal khizyi fil hayaatid dunyaa wa la'azaabul Aakhirati akhzaa wa hum laa yunsaroon)

तो हमने उन पर नहूसत के दिनों में [44] एक इंतिहाई तेज़ सर्द आंधी भेजी [43] ताकि हम उन्हें दुनियावी ज़िंदगी में रुसवाई का अज़ाब चखा दें; और यक़ीनन आख़िरत का अज़ाब तो और भी ज़्यादा रुसवाकुन है [45] और उनकी कोई मदद नहीं की जाएगी [46]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 16

तो हमने उन पर नहूसत के दिनों में [44] एक इंतिहाई तेज़ सर्द आंधी भेजी [43] ताकि हम उन्हें दुनियावी ज़िंदगी में रुसवाई का अज़ाब चखा दें; और यक़ीनन आख़िरत का अज़ाब तो और भी ज़्यादा रुसवाकुन है [45] और उनकी कोई मदद नहीं की जाएगी [46]!

[43] बे-बारिश की हलाकन सर्द आंधी

अल्लाह तआला ने क़ौम-ए-आद पर ऐसी आंधी भेजी जिसमें बारिश की एक बूंद न थी, बल्कि वह इंतिहाई तेज़, कड़कड़ाती और सख़्त ठंडी हवा थी। यह आंधी उन्हें हवा में उठा-उठा कर ज़मीन पर पटकती थी जिससे उनके सर कट-कट कर खजूर के कटे हुए तनों की तरह गिरते थे। अल्लाह तआला बड़ी से बड़ी सरकश क़ौम को एक हवा के झोंके से हलाक फ़रमा देता है।

[44] नहूसत भरे दिन

तफ़सीर रूहुल मआनी में है कि यह अज़ाब 22 शव्वाल बुध के रोज़ शुरू हुआ और 29 शव्वाल बुध तक मुसलसल आठ दिन और सात रातें जारी रहा। जिस दिन किसी क़ौम पर अज़ाब नाज़िल हो वह दिन उनके हक़ में मनहूस होता है। इसी तरह जिस दिन बंदा गुनाह करे और रब की नाफ़रमानी करे वह दिन उसके लिए मनहूस है।

[45] आख़िरत की ज़िल्लत व रुसवाई

दुनिया में तो वे हवा के थपेड़ों से ज़लील होकर हलाक हुए, लेकिन आख़िरत का अज़ाब इससे कहीं ज़्यादा ज़िल्लत-आमेज़ और दर्दनाक होगा जो कभी ख़त्म न होगा।

[46] किसी मददगार और शफ़ीअ का न होना

काफ़िरों का कोई मददगार, हामी या सिफ़ारिशी नहीं होगा। दुनिया में जिन बुतों और सरदारों पर वे नाज़ करते थे, वे सब वहां बेबस होंगे।

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