कुरान - 41:18 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
وَنَجَّيۡنَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَكَانُواْ يَتَّقُونَ

Transliteration: (Wa najjainal lazeena aamanoo wa kaanoo yattaqoon (section 2))

और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और परहेज़गारी (तक़्वा) इख़्तियार करते थे [50]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 18

और हमने उन लोगों को बचा लिया जो ईमान लाए थे और परहेज़गारी (तक़्वा) इख़्तियार करते थे [50]!

[50] मोमिनीन और मुत्तक़ीन की नजात

हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम और उनके साथ जो अहले-ईमान थे (जिनकी तादाद रिवायत के मुताबिक़ तक़रीबन 110 थी), अल्लाह तआला ने अज़ाब आने से क़बल ही उन्हें उस बस्ती से हिफ़ाज़त के साथ निकाल लिया और उन्हें मुकम्मल सलामती बख़्शी। इससे मालूम हुआ कि:

  • ईमान और तक़्वा दुनिया व आख़िरत दोनों जहां में नजात और हिफ़ाज़त का ज़रिया हैं।
  • जब तक किसी क़ौम में नेक और मुत्तक़ी बंदे मौजूद रहते हैं, अल्लाह तआला आम अज़ाब को टालता रहता है। नेक बंदों की मौजूदगी अज़ाब के लिए ढाल है।

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