कुरान - 41:19 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَيَوۡمَ يُحۡشَرُ أَعۡدَآءُ ٱللَّهِ إِلَى ٱلنَّارِ فَهُمۡ يُوزَعُونَ

Transliteration: (Wa yawma yuhsharu a'daaa'ul laahi ilan Naari fahum yooza'oon)

और जिस दिन अल्लाह के दुश्मनों को आग की तरफ़ हांका जाएगा [51], तो उन्हें (क़तारों में) रोक-रोक कर लाया जाएगा [52]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 19

और जिस दिन अल्लाह के दुश्मनों को आग की तरफ़ हांका जाएगा [51], तो उन्हें (क़तारों में) रोक-रोक कर लाया जाएगा [52];

[51] काफ़िरों को ज़िल्लत के साथ दोज़ख़ की तरफ़ हांकना

क़यामत के दिन फ़रिश्ते अल्लाह के दुश्मनों यानी काफ़िरों और मुशरिकों को इंतिहाई रुसवाई और ज़िल्लत के साथ ज़बरदस्ती घसीटते हुए जहन्नम की आग की तरफ़ ले जाएंगे, जिस तरह ज़ालिम मुजरिमों या जानवरों को क़साईखाने की तरफ़ घसीटा जाता है।

[52] अगली और पिछली जमाअतों का इज्तिमा

जहन्नम के किनारे अगली जमाअतों को रोक कर रखा जाएगा ताकि पिछली जमाअतें भी आकर उनसे मिल जाएं, और फिर सब के सब एक साथ एक दूसरे की ज़िल्लत व रुसवाई को देखते हुए जहन्नम में झोंके जाएं।

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