कुरान - 41:17 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
وَأَمَّا ثَمُودُ فَهَدَيۡنَٰهُمۡ فَٱسۡتَحَبُّواْ ٱلۡعَمَىٰ عَلَى ٱلۡهُدَىٰ فَأَخَذَتۡهُمۡ صَٰعِقَةُ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡهُونِ بِمَا كَانُواْ يَكۡسِبُونَ

Transliteration: (Wa ammaa Samoodu fahadinaahum fastahabbul 'ama 'alal huda fa akhazathum saa'iqatul 'azaabil hooni bimaa kaanoo yaksiboon)

और रहे समूद, तो हमने उन्हें सीधा रास्ता दिखाया [47] मगर उन्होंने हिदायत के मुक़ाबले में अंधेपन (गुमराही) को पसंद किया; तो उन्हें रुसवाकुन अज़ाब की कड़क ने [48] उनके करतूतों के बदले [49] आ पकड़ा; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 17

और रहे समूद, तो हमने उन्हें सीधा रास्ता दिखाया [47] मगर उन्होंने हिदायत के मुक़ाबले में अंधेपन (गुमराही) को पसंद किया; तो उन्हें रुसवाकुन अज़ाब की कड़क ने [48] उनके करतूतों के बदले [49] आ पकड़ा;

[47] रसूल के ज़रिए हिदायत की रहनुमाई

अल्लाह तआला ने हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम को मोजिज़ात (जैसे पहाड़ से ऊंटनी का निकलना) के साथ भेजा और हक़ का रास्ता वाज़ेह फ़रमा दिया। रसूल का रास्ता दिखाना दरअस्ल अल्लाह ही का हिदायत फ़रमाना है, मगर उन बदबख़्तों ने ऊंटनी की कूचें काट कर हिदायत पर गुमराही को तरजीह दी।

[48] रुसवाकुन कड़क और आसमानी चीख़

हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम ने एक ऐसी हैबतनाक चीख़ मारी जिससे उनके कलेजे फट गए और वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए। साथ ही आसमान से बिजली की कड़क और ज़लज़ला आया जिसने उन्हें तबाह कर दिया।

[49] अपने बुरे आमाल का बदला

यह अज़ाब उनके अपने कुफ़्र, ज़ुल्म और नाफ़रमानियों का नतीजा था। अल्लाह तआला किसी पर ज़ुल्म नहीं फ़रमाता, बल्कि इंसान अपने बुरे करतूतों से ख़ुद हलाकत मोल लेता है।

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