Transliteration: (Wa qaalal lazeena kafaroo laa tasma'oo lihaazal Quraani walghaw feehi la'allakum taghliboon)
और काफ़िरों ने कहा [68]: इस क़à¥à¤°à¤†à¤¨ को सà¥à¤¨à¥‹ ही मत और (जब यह पढ़ा जाठतो) इसमें शोर-गà¥à¤² मचाओ [69] ताकि शायद तà¥à¤® ग़ालिब आ जाओ [70]!
क़à¥à¤°à¥ˆà¤¶ के सरदारों ने आपस में तय किया कि न तो ख़à¥à¤¦ क़à¥à¤°à¤†à¤¨ सà¥à¤¨à¥‹ और न दूसरों को सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ दो, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे जानते थे कि क़à¥à¤°à¤†à¤¨ के कलाम में à¤à¤¸à¥€ तासीर और मोजिज़ा है कि जो इसे संजीदगी से सà¥à¤¨ लेगा वह इसका गिरवीदा हो जाà¤à¤—ा। इसलिठवे लोगों को रोकने की साज़िशें करते थे।
जब हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® क़à¥à¤°à¤†à¤¨ की तिलावत फ़रमाते, तो मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•़ीन तालियां बजाते, सीटियां मारते और शोर मचाते ताकि आवाज़ दब जाà¤à¥¤ उलमा-à¤-किराम फ़रमाते हैं कि क़à¥à¤°à¤†à¤¨ की तिलावत के वक़à¥à¤¤ शोर मचाना, बातें करना या गाना-बजाना मà¥à¤¶à¤°à¤¿à¤•ों का तरीक़ा है और सख़à¥à¤¤ हराम व गà¥à¤¨à¤¾à¤¹ है। तिलावत के वक़à¥à¤¤ मà¥à¤•मà¥à¤®à¤² अदब व ख़ामोशी वाजिब है।
काफ़िरों का ख़à¥à¤¯à¤¾à¤² था कि शोर मचा कर वे नबी करीम ï·º को तिलावत से रोक देंगे और बाज़ी जीत लेंगे, मगर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला ने अपने कलाम की हिफ़ाज़त फ़रमाई और उनकी तमाम साज़िशों को नाकाम व रà¥à¤¸à¤µà¤¾ कर दिया।
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