कुरान - 41:25 सूरह फुस्सिलात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

25
۞وَقَيَّضۡنَا لَهُمۡ قُرَنَآءَ فَزَيَّنُواْ لَهُم مَّا بَيۡنَ أَيۡدِيهِمۡ وَمَا خَلۡفَهُمۡ وَحَقَّ عَلَيۡهِمُ ٱلۡقَوۡلُ فِيٓ أُمَمٖ قَدۡ خَلَتۡ مِن قَبۡلِهِم مِّنَ ٱلۡجِنِّ وَٱلۡإِنسِۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ خَٰسِرِينَ

Transliteration: (Wa qaiyadnaa lahum quranaaa'a fazaiyanoo lahum maa baina aideehim wa maa khalfahum wa haqqa 'alaihimul qawlu feee umamin qad khalat min qablihim minal jinni wal insi innahum kaanoo khaasireen (section 3))

और हमने उनके लिए कुछ (बुरे) साथी मुक़र्रर कर दिए थे [64], जिन्होंने उनके लिए वह सब कुछ ख़ुशनुमा बना दिया जो उनके आगे था और जो उनके पीछे था [65]; और उन पर भी उन उम्मतों के साथ (अज़ाब का) फ़रमान साबित हो गया [66] जो उनसे पहले जिन्नों और इंसानों में से गुज़र चुकी थीं [67]; बेशक वे सब के सब घाटे में रहने वाले थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह फुस्सिलात आयत 25 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह फ़ुस्सिलत (हा-मीम अस-सजदा) तफ़सीर - आयत 25

और हमने उनके लिए कुछ (बुरे) साथी मुक़र्रर कर दिए थे [64], जिन्होंने उनके लिए वह सब कुछ ख़ुशनुमा बना दिया जो उनके आगे था और जो उनके पीछे था [65]; और उन पर भी उन उम्मतों के साथ (अज़ाब का) फ़रमान साबित हो गया [66] जो उनसे पहले जिन्नों और इंसानों में से गुज़र चुकी थीं [67]; बेशक वे सब के सब घाटे में रहने वाले थे।

[64] बुरे साथियों की सोहबत बतौरे सज़ा

जो लोग हक़ से मुंह मोड़ते हैं, अल्लाह तआला उनके ऊपर शयातीन और बुरे दोस्त मुसल्लत फ़रमा देता है जो उन्हें गुनाहों की तरफ़ धकेलते हैं। बुरी सोहबत अल्लाह की तरफ़ से सज़ा की अलामत है, जबकि नेक सोहबत रहमत-ए-इलाही की अलामत है।

[65] गुनाहों और दुनिया को दिलफ़रेब बना कर दिखाना

उन शैतानी साथियों ने काफ़िरों की नज़रों में मौजूदा गुनाहों को अच्छा कर के दिखाया और आख़िरत के अज़ाब को भुला दिया। उन्होंने दुनिया की लज़्ज़तों को महबूब बना दिया जिससे वे अपनी मौत और क़ब्र को भूल गए।

[66] अज़ाब के हुक्म का लाज़िम होना

उनकी मुसलसल सरकशी और कुफ़्र की बिना पर उन पर अल्लाह के अज़ाब का फ़ैसला लाज़िम और हक़ीक़त बन गया, जैसा कि पिछली मुनकिर क़ौमों पर साबित हुआ था।

[67] जिन्नात और इंसानों का मुश्तरका अंजाम

काफ़िर जिन्नात और काफ़िर इंसान सब दोज़ख़ में एक साथ अज़ाब भुगतेंगे और हर किस्म के नुक़सान व हलाकत में हमेशा घिरे रहेंगे।

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