Transliteration: (Wa qaiyadnaa lahum quranaaa'a fazaiyanoo lahum maa baina aideehim wa maa khalfahum wa haqqa 'alaihimul qawlu feee umamin qad khalat min qablihim minal jinni wal insi innahum kaanoo khaasireen (section 3))
और हमने उनके लिठकà¥à¤› (बà¥à¤°à¥‡) साथी मà¥à¤•़रà¥à¤°à¤° कर दिठथे [64], जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने उनके लिठवह सब कà¥à¤› ख़à¥à¤¶à¤¨à¥à¤®à¤¾ बना दिया जो उनके आगे था और जो उनके पीछे था [65]; और उन पर à¤à¥€ उन उमà¥à¤®à¤¤à¥‹à¤‚ के साथ (अज़ाब का) फ़रमान साबित हो गया [66] जो उनसे पहले जिनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ और इंसानों में से गà¥à¤œà¤¼à¤° चà¥à¤•ी थीं [67]; बेशक वे सब के सब घाटे में रहने वाले थे।
जो लोग हक़ से मà¥à¤‚ह मोड़ते हैं, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला उनके ऊपर शयातीन और बà¥à¤°à¥‡ दोसà¥à¤¤ मà¥à¤¸à¤²à¥à¤²à¤¤ फ़रमा देता है जो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ की तरफ़ धकेलते हैं। बà¥à¤°à¥€ सोहबत अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की तरफ़ से सज़ा की अलामत है, जबकि नेक सोहबत रहमत-à¤-इलाही की अलामत है।
उन शैतानी साथियों ने काफ़िरों की नज़रों में मौजूदा गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¥‹à¤‚ को अचà¥à¤›à¤¾ कर के दिखाया और आख़िरत के अज़ाब को à¤à¥à¤²à¤¾ दिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की लज़à¥à¤œà¤¼à¤¤à¥‹à¤‚ को महबूब बना दिया जिससे वे अपनी मौत और क़बà¥à¤° को à¤à¥‚ल गà¤à¥¤
उनकी मà¥à¤¸à¤²à¤¸à¤² सरकशी और कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° की बिना पर उन पर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के अज़ाब का फ़ैसला लाज़िम और हक़ीक़त बन गया, जैसा कि पिछली मà¥à¤¨à¤•िर क़ौमों पर साबित हà¥à¤† था।
काफ़िर जिनà¥à¤¨à¤¾à¤¤ और काफ़िर इंसान सब दोज़ख़ में à¤à¤• साथ अज़ाब à¤à¥à¤—तेंगे और हर किसà¥à¤® के नà¥à¤•़सान व हलाकत में हमेशा घिरे रहेंगे।
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