कुरान - 40:36 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

36
وَقَالَ فِرۡعَوۡنُ يَٰهَٰمَٰنُ ٱبۡنِ لِي صَرۡحٗا لَّعَلِّيٓ أَبۡلُغُ ٱلۡأَسۡبَٰبَ

Transliteration: (Wa qaala Fir'awnu yaa Haamaanub-ni lee sarhal la'alleee ablughul asbaab)

और फ़िरऔन ने कहा [97]: 'ऐ हामान! मेरे लिए एक बुलंद महल (मीनार) बना ताकि मैं रास्तों तक पहुँच सकूँ [98];' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 36 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 36

"और फ़िरऔन ने कहा [97]: 'ऐ हामान! मेरे लिए एक बुलंद महल (मीनार) बना ताकि मैं रास्तों तक पहुँच सकूँ [98];'"

[97] फ़िरऔन का मुज़हका-ख़ेज़ घमंड

फ़िरऔन ने अपने वज़ीर हामान को निहायत तकब्बुर और मज़ाक़ के तौर पर एक अज़ीम मीनार बनाने का हुक्म दिया ताकि अपनी रियाया को धोखे में रख सके।

[98] पकी हुई ईंटों का बुलंद मीनार

उसने हामान को हुक्म दिया कि मिट्टी पकाकर ईंटें तैयार करे और एक ऐसा ऊँचा मीनार तामीर करे जिससे वह आसमान के रास्तों तक झांक सके। यह उसकी अक़्ल की पस्ती और जिहालत का खुला सबूत था।

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