कुरान - 40:37 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
أَسۡبَٰبَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ فَأَطَّلِعَ إِلَىٰٓ إِلَٰهِ مُوسَىٰ وَإِنِّي لَأَظُنُّهُۥ كَٰذِبٗاۚ وَكَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِفِرۡعَوۡنَ سُوٓءُ عَمَلِهِۦ وَصُدَّ عَنِ ٱلسَّبِيلِۚ وَمَا كَيۡدُ فِرۡعَوۡنَ إِلَّا فِي تَبَابٖ

Transliteration: (Asbaabas samaawaati faattali'a ilaaa ilaahi Moosaa wa innee la azunnuhoo kaazibaa; wa kazaalika zuyyina li-Fir'awna sooo'u 'amalihee wa sudda 'anis sabeel; wa maa kaidu Fir'awna illaa fee tabaab (section 4))

'आसमानों के रास्तों तक [99], ताकि मैं मूसा के ख़ुदा को झांक कर देखूँ [100], और बेशक मैं तो उसे झूठा समझता हूँ [101]'; और इसी तरह फ़िरऔन की निगाह में उसका बुरा अमल भला कर दिखाया गया [102] और वह (सीधी) राह से रोक दिया गया [103], और फ़िरऔन का दाँव तो सिर्फ़ हलाकत ही में रहा [104] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 37

"'आसमानों के रास्तों तक [99], ताकि मैं मूसा के ख़ुदा को झांक कर देखूँ [100], और बेशक मैं तो उसे झूठा समझता हूँ [101]'; और इसी तरह फ़िरऔन की निगाह में उसका बुरा अमल भला कर दिखाया गया [102] और वह (सीधी) राह से रोक दिया गया [103], और फ़िरऔन का दाँव तो सिर्फ़ हलाकत ही में रहा [104] ।"

[99] आसमानों की तरफ़ चढ़ने का ख़ाम ख़्याल

फ़िरऔन यह समझता था कि मीनार पर चढ़कर वह आसमानों के रास्तों तक पहुँच जाएगा।

[100] ख़ुदा के मक़ाम के बारे में ग़लतफ़हमी

अल्लाह तआला ज़मान व मकान और सिम्त (दिशा) से पाक है। वह किसी ख़ास जगह या आसमान में महदूद नहीं है।

[101] फ़िरऔन का बातिनी ख़ौफ़

ज़ाहिर में उसने मूसा अलैहिस्सलाम को झूठा कहा, मगर बातिन में वह जानता था कि मूसा अलैहिस्सलाम सच्चे नबी हैं।

[102] बुरे आमाल का दिलकश नज़र आना

गुनाहों की कसरत से इंसान की अक़्ल ऐसी मफ़लूज हो जाती है कि उसकी बदतरीन बुराइयां भी उसे अच्छी नज़र आने लगती हैं।

[103] हिदायत के रास्ते से महरूमी

तकब्बुर के सबब उस पर हिदायत के दरवाज़े बंद कर दिए गए।

[104] फ़िरऔनी साज़िश का मुकम्मल नुक़सान

उसका मीनार, उसकी साज़िशें और उसकी बादशाही सब ख़ाक में मिल गईं और वह दरिया-ए-नील में ग़र्क़ होकर इबरत का निशान बन गया।

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