कुरान - 40:35 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
ٱلَّذِينَ يُجَٰدِلُونَ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ بِغَيۡرِ سُلۡطَٰنٍ أَتَىٰهُمۡۖ كَبُرَ مَقۡتًا عِندَ ٱللَّهِ وَعِندَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْۚ كَذَٰلِكَ يَطۡبَعُ ٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ قَلۡبِ مُتَكَبِّرٖ جَبَّارٖ

Transliteration: (Allazeena yujaadiloona feee Aaayaatil laahi bighairi sultaanin ataahum kabura maqtan 'indal laahi wa 'indal lazeena aamanoo; kazaalika yatbahul laahu 'alaa kulli qalbi mutakabbirin jabbaar)

वे जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते हैं बग़ैर किसी सनद के जो उनके पास आई हो [93] [94]; यह बात अल्लाह के नज़दीक और ईमान वालों के नज़दीक सख़्त नापसंदीदा है [95]; इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर, सरकश के दिल पर मुहर लगा देता है [96] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 35

"वे जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते हैं बग़ैर किसी सनद के जो उनके पास आई हो [93] [94]; यह बात अल्लाह के नज़दीक और ईमान वालों के नज़दीक सख़्त नापसंदीदा है [95]; इसी तरह अल्लाह हर मुतकब्बिर, सरकश के दिल पर मुहर लगा देता है [96] ।"

[93] बिला दलील हक़ से झगड़ा

अल्लाह की आयतों और नबियों के मोजिज़ात को बेबुनियाद एतराज़ात से झुठलाना बदतरीन जुर्म है।

[94] सनद व दलील का फ़क़्दान

उनके पास अपने बातिल दावे की न कोई अक़्ली दलील होती है और न कोई आसमानी सनद।

[95] मक़्त-ए-इलाही और मोमिनों की बेज़ारी

अल्लाह तआला और सच्चे अहले ईमान ऐसे हठधर्मियों और मुनकिरों से सख़्त नफ़रत व बेज़ारी का इज़हार करते हैं।

[96] मुतकब्बिरों के दिलों पर मुहर

जो लोग तकब्बुर और ज़ुल्म का शेवा अपनाते हैं, अल्लाह उनके दिलों पर ऐसी मुहर लगा देता है कि फिर कोई हक़ बात उनके दिल में असर नहीं करती।

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