Transliteration: (Allazeena yujaadiloona feee Aaayaatil laahi bighairi sultaanin ataahum kabura maqtan 'indal laahi wa 'indal lazeena aamanoo; kazaalika yatbahul laahu 'alaa kulli qalbi mutakabbirin jabbaar)
"वे जो अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की आयतों में à¤à¤—ड़ते हैं बग़ैर किसी सनद के जो उनके पास आई हो [93] [94]; यह बात अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के नज़दीक और ईमान वालों के नज़दीक सख़à¥à¤¤ नापसंदीदा है [95]; इसी तरह अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ हर मà¥à¤¤à¤•बà¥à¤¬à¤¿à¤°, सरकश के दिल पर मà¥à¤¹à¤° लगा देता है [96] ।"
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की आयतों और नबियों के मोजिज़ात को बेबà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤¦ à¤à¤¤à¤°à¤¾à¤œà¤¼à¤¾à¤¤ से à¤à¥à¤ लाना बदतरीन जà¥à¤°à¥à¤® है।
उनके पास अपने बातिल दावे की न कोई अक़à¥à¤²à¥€ दलील होती है और न कोई आसमानी सनद।
अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ तआला और सचà¥à¤šà¥‡ अहले ईमान à¤à¤¸à¥‡ हठधरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और मà¥à¤¨à¤•िरों से सख़à¥à¤¤ नफ़रत व बेज़ारी का इज़हार करते हैं।
जो लोग तकबà¥à¤¬à¥à¤° और ज़à¥à¤²à¥à¤® का शेवा अपनाते हैं, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ उनके दिलों पर à¤à¤¸à¥€ मà¥à¤¹à¤° लगा देता है कि फिर कोई हक़ बात उनके दिल में असर नहीं करती।
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