Transliteration: (Yaa qawmi innamaa haazihil hayaatud dunyaa mataa'unw wa innal Aakhirata hiya daarul qaraar)
"'ठमेरी क़ौम! यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की ज़िंदगी तो बस चनà¥à¤¦ रोज़ा फ़ायदा उठाना है [106], और बेशक आख़िरत ही हमेशा क़ायम रहने का घर है [107] ।'"
दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की दौलत, हà¥à¤•ूमत और à¤à¤¶-ओ-आराम बहà¥à¤¤ आरज़ी और चनà¥à¤¦ रोज़ा हैं। यह महज़ मà¥à¤¸à¤¾à¤«à¤¼à¤¿à¤°à¤–़ाना है जहाठइंसान को इमà¥à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¨ के लिठà¤à¥‡à¤œà¤¾ गया है।
आख़िरत ही इंसान का असà¥à¤² और हमेशा रहने वाला घर है जहाठकà¤à¥€ ज़वाल नहीं आà¤à¤—ा। अक़à¥à¤²à¤®à¤‚द वह है जो फ़ानी दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के बदले दायमी आख़िरत को संवारे।
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