कुरान - 40:41 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
۞وَيَٰقَوۡمِ مَا لِيٓ أَدۡعُوكُمۡ إِلَى ٱلنَّجَوٰةِ وَتَدۡعُونَنِيٓ إِلَى ٱلنَّارِ

Transliteration: (Wa yaa qawmi maa leee ad'ookum ilan najaati wa tad'oonaneee ilan Naar)

'और ऐ मेरी क़ौम! मुझे क्या हुआ है कि मैं तुम्हें नजात की तरफ़ बुलाता हूँ [112], और तुम मुझे आग (दोज़ख़) की तरफ़ बुलाते हो?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 41

"'और ऐ मेरी क़ौम! मुझे क्या हुआ है कि मैं तुम्हें नजात की तरफ़ बुलाता हूँ [112], और तुम मुझे आग (दोज़ख़) की तरफ़ बुलाते हो?'"

[112] नजात बनाम दोज़ख़ की दावत

मोमिन मर्द ने अपनी क़ौम की हठधर्मी पर हैरत का इज़हार किया कि मैं तो तुम्हें ईमान, तौहीद और जन्नत की नजात की तरफ़ बुला रहा हूँ, और तुम मुझे शिर्क और जहन्नम की आग की तरफ़ धकेलना चाहते हो!

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