कुरान - 40:42 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
تَدۡعُونَنِي لِأَكۡفُرَ بِٱللَّهِ وَأُشۡرِكَ بِهِۦ مَا لَيۡسَ لِي بِهِۦ عِلۡمٞ وَأَنَا۠ أَدۡعُوكُمۡ إِلَى ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡغَفَّـٰرِ

Transliteration: (Tad'oonanee li-akfura billaahi wa ushrika bihee maa laisa lee bihee 'ilmunw wa ana ad'ookum ilal'Azeezil Ghaffaar)

'तुम मुझे बुलाते हो कि मैं अल्लाह का इनकार करूँ और उसके साथ उसे शरीक ठहराऊँ जिसका मुझे कोई इल्म (सनद) नहीं [113], और मैं तुम्हें उस ज़बरदस्त, बड़े बख़्शने वाले (अल्लाह) की तरफ़ बुलाता हूँ [114] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 42

"'तुम मुझे बुलाते हो कि मैं अल्लाह का इनकार करूँ और उसके साथ उसे शरीक ठहराऊँ जिसका मुझे कोई इल्म (सनद) नहीं [113], और मैं तुम्हें उस ज़बरदस्त, बड़े बख़्शने वाले (अल्लाह) की तरफ़ बुलाता हूँ [114] ।'"

[113] शिर्क की बेबुनियादी

शिर्क की कोई दलील या सनद नहीं है, यह महज़ जिहालत और बाप-दादा की अंधी तक़लीद है।

[114] अज़ीज़ व ग़फ़्फ़ार की दावत

मैं तुम्हें उस अल्लाह की तरफ़ बुलाता हूँ जो सब पर ग़ालिब है और तौबा करने वालों के गुनाहों को बख़्श देने वाला है।

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