कुरान - 40:44 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
فَسَتَذۡكُرُونَ مَآ أَقُولُ لَكُمۡۚ وَأُفَوِّضُ أَمۡرِيٓ إِلَى ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱللَّهَ بَصِيرُۢ بِٱلۡعِبَادِ

Transliteration: (Fasatazkuroona maaa aqoolu lakum; wa ufawwidu amreee ilal laah; innallaaha baseerum bil'ibaad)

'तो अनक़रीब तुम याद करोगे जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ [117]; और मैं अपने मामलात अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ [118]; बेशक अल्लाह बंदों को देख रहा है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 44

"'तो अनक़रीब तुम याद करोगे जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ [117]; और मैं अपने मामलात अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ [118]; बेशक अल्लाह बंदों को देख रहा है।'"

[117] अज़ाब के वक़्त हसरत से याद करना

जब तुम पर अज़ाब नाज़िल होगा तो तुम्हें मेरी यह नसीहत याद आएगी, मगर उस वक़्त का पछतावा कोई फ़ायदा न देगा।

[118] 'उफ़व्विज़ु अम्री इलल्लाह'—कमाल-ए-तवक्कुल की दुआ

जब फ़िरऔन ने उन्हें क़त्ल की धमकी दी, तो उन्होंने निहायत इस्तिक़ामत से फ़रमाया: 'व-उफ़व्विज़ु अम्री इलल्लाह'—मैं अपने तमाम मामलात अल्लाह के सुपुर्द करता हूँ। यह दुआ हर मुसीबत और दुश्मन के ख़ौफ़ के वक़्त हिफ़ाज़त का अज़ीम वज़ीफ़ा है।

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