कुरान - 40:46 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
ٱلنَّارُ يُعۡرَضُونَ عَلَيۡهَا غُدُوّٗا وَعَشِيّٗاۚ وَيَوۡمَ تَقُومُ ٱلسَّاعَةُ أَدۡخِلُوٓاْ ءَالَ فِرۡعَوۡنَ أَشَدَّ ٱلۡعَذَابِ

Transliteration: (An Naaru yu'radoona 'alaihaa ghuduwwanw wa 'ashiyyanw wa Yawma taqoomus Saa'aatu adkhilooo Aala Fir'awna ashaddal 'azaab)

आग है जिसके सामने वे सुबह और शाम पेश किए जाते हैं [122], और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी हुक्म होगा [123]: 'फ़िरऔन वालों को सख़्त तरीन अज़ाब में झोंक दो [124] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 46

"आग है जिसके सामने वे सुबह और शाम पेश किए जाते हैं [122], और जिस दिन क़ियामत क़ायम होगी हुक्म होगा [123]: 'फ़िरऔन वालों को सख़्त तरीन अज़ाब में झोंक दो [124] ।'"

[122] अज़ाब-ए-क़ब्र (बरज़ख़ का अज़ाब) का क़तई सबूत

यह आयत अज़ाब-ए-क़ब्र के बरहक़ होने की रोशन क़ुरआनी सनद है। फ़िरऔनियों की रूहों को उनकी क़ब्रों और बरज़ख़ में हर रोज़ सुबह और शाम दोज़ख़ की आग के सामने पेश किया जाता है जिससे वे शदीद तकलीफ़ पाते हैं।

[123] क़ियामत के दिन जहन्नम का हुक्म

क़ियामत के दिन जब हिसाब होगा, तो फ़रिश्तों को हुक्म दिया जाएगा कि अब इन्हें मुस्तक़िल तौर पर जहन्नम की भड़कती आग में डाल दो।

[124] अशद्दुल-अज़ाब—सख़्त तरीन अज़ाब

फ़िरऔन और उसके सरकश साथियों के लिए जहन्नम का सबसे निचला और ख़ौफ़नाक तबक़ा होगा जहाँ उन्हें सख़्त तरीन अज़ाब दिया जाएगा।

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