कुरान - 40:43 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدۡعُونَنِيٓ إِلَيۡهِ لَيۡسَ لَهُۥ دَعۡوَةٞ فِي ٱلدُّنۡيَا وَلَا فِي ٱلۡأٓخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَآ إِلَى ٱللَّهِ وَأَنَّ ٱلۡمُسۡرِفِينَ هُمۡ أَصۡحَٰبُ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Laa jarama annamaa tad'oonanee ilaihi laisa lahoo da'watun fid dunyaa wa laa fil Aakhirati wa anna maraddanaaa ilal laahi wa annal musrifeenahum Ashaabun Naar)

'हक़ीक़त यह है कि जिसकी तरफ़ तुम मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में [115], और हमारा पलटना अल्लाह ही की तरफ़ है [116], और हद से बढ़ने वाले ही दोज़ख़ी हैं।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 43

"'हक़ीक़त यह है कि जिसकी तरफ़ तुम मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में [115], और हमारा पलटना अल्लाह ही की तरफ़ है [116], और हद से बढ़ने वाले ही दोज़ख़ी हैं।'"

[115] बुतों की मुकम्मल बेअसरी

तुम्हारे झूठे माबूद न दुनिया में किसी की दुआ सुन सकते हैं और न आख़िरत में कोई नफ़ा या शफ़ाअत कर सकते हैं। वे बिल्कुल बेबस और बेजान हैं।

[116] रुजूअ-ए-इलाही और सरकशों का अंजाम

हम सबको अल्लाह ही की बारगाह में हाज़िर होना है, और जो लोग हद से तजावुज़ करके शिर्क पर अड़े रहे वे ही जहन्नम का ईंधन बनेंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now