कुरान - 40:40 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
مَنۡ عَمِلَ سَيِّئَةٗ فَلَا يُجۡزَىٰٓ إِلَّا مِثۡلَهَاۖ وَمَنۡ عَمِلَ صَٰلِحٗا مِّن ذَكَرٍ أَوۡ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤۡمِنٞ فَأُوْلَـٰٓئِكَ يَدۡخُلُونَ ٱلۡجَنَّةَ يُرۡزَقُونَ فِيهَا بِغَيۡرِ حِسَابٖ

Transliteration: (Man 'amila saiyi'atan falaa yujzaaa illaa mislahaa wa man 'amila saaliham min zakarin aw unsaa wa huwa mu'minun fa ulaaa'ika yadkhuloonal Jannata yurzaqoona feehaa bighairi hisaab)

'जो बुराई करे तो उसे सिर्फ़ उसके बराबर ही बदला दिया जाएगा [108], और जो नेक अमल करे ख़्वाह मर्द हो या औरत और वह मोमिन हो [109], तो वही लोग जन्नत में दाख़िल होंगे [110] जहाँ उन्हें बे-हिसाब रिज़्क़ दिया जाएगा [111] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 40

"'जो बुराई करे तो उसे सिर्फ़ उसके बराबर ही बदला दिया जाएगा [108], और जो नेक अमल करे ख़्वाह मर्द हो या औरत और वह मोमिन हो [109], तो वही लोग जन्नत में दाख़िल होंगे [110] जहाँ उन्हें बे-हिसाब रिज़्क़ दिया जाएगा [111] ।'"

[108] गुनाह की बराबर सज़ा

अल्लाह का इंसाफ़ है कि गुनाह की सज़ा उसके बराबर ही होगी, उसमें कोई ज़्यादती नहीं की जाएगी।

[109] आमाल की क़बूलियत के लिए ईमान शर्त

चाहे मर्द हो या औरत, नेक आमाल का अज्र उसी वक़्त मिलेगा जब बंदा मोमिन हो। ईमान के बग़ैर कोई भी अमल बारगाह-ए-इलाही में मक़बूल नहीं।

[110] जन्नत में दाख़िला

सच्चे ईमान और नेक अमल वाले अल्लाह के फ़ज़्ल से जन्नत-उल-फ़िरदौस के हक़दार बनेंगे।

[111] बे-हिसाब नेमतें

जन्नत में अल्लाह तआला अपने बंदों को ऐसी ला-महदूद और बेमिसाल नेमतें अता फ़रमाएगा जिनका न कोई शुमार है और न कभी ख़त्म होने का ख़ौफ़।

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