Transliteration: (Kazzabat qablahum qawmu Noohinw wal Ahzaabu min ba'dihim wa hammat kullu ummatin bi Rasoolihim li ya'khuzoohu wa jaadaloo bilbaatili li yud hidoo bihil haqqa fa akhaztuhum fa kaifa kaana 'iqaab)
"इनसे पहले नूह की क़ौम ने और उनके बाद के गिरोहों ने (रसूलों को) à¤à¥à¤ लाया [10], और हर उमà¥à¤®à¤¤ ने अपने रसूल के बारे में यह इरादा किया कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पकड़ लें (क़तà¥à¤² या क़ैद कर दें) [11], और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बातिल के ज़रिये à¤à¤—ड़ा किया [12] ताकि उसके ज़रिये हक़ को डिगा दें [13], तो मैंने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पकड़ लिया, तो देखो मेरा अज़ाब कैसा था [14]!"
हज़रत नूह अलैहिसà¥à¤¸à¤²à¤¾à¤® की क़ौम, आद, समूद और दीगर क़ौमों ने à¤à¥€ अपने अंबिया को à¤à¥à¤ लाया था। उनके पास à¤à¥€ दौलत और ताक़त थी, मगर कà¥à¤«à¤¼à¥à¤° ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ तबाह कर दिया।
हर ज़माने के नाफ़रमानों ने अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ के रसूलों को नà¥à¤•़सान पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¥‡, क़ैद करने या शहीद करने की नापाक कोशिशें कीं, मगर अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ ने हमेशा अपने रसूलों की हिफ़ाज़त फ़रमाई।
वे जादू, शायराना कलाम या à¤à¥‚ठे फ़लसफ़ों के ज़रिये मोजिज़ात का मà¥à¤•़ाबला करने की कोशिश करते थे।
उनका मक़सद था कि हक़ की रौशनी को बà¥à¤à¤¾ दें, मगर हक़ हमेशा ग़ालिब रहा और बातिल मिट कर रहा।
जब अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का अज़ाब आया, तो कोई क़ौम अपने आपको न बचा सकी—तूफ़ान, चीख़, पतà¥à¤¥à¤°à¥‹à¤‚ और ज़लज़लों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नेसà¥à¤¤-ओ-नाबूद कर दिया।
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