कुरान - 40:3 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
غَافِرِ ٱلذَّنۢبِ وَقَابِلِ ٱلتَّوۡبِ شَدِيدِ ٱلۡعِقَابِ ذِي ٱلطَّوۡلِۖ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَۖ إِلَيۡهِ ٱلۡمَصِيرُ

Transliteration: (Ghaafiriz zambi wa qaabilit tawbi shadeedil 'iqaabi zit tawli laaa ilaaha illaa Huwa ilaihil maseer)

गुनाहों का बख़्शने वाला [3], तौबा क़बूल फ़रमाने वाला [4], सख़्त अज़ाब देने वाला [5], बड़ा फ़ज़्ल व एहसान फ़रमाने वाला [6]; उसके सिवा कोई माबूद नहीं, उसी की तरफ़ पलट कर जाना है [7] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 3

"गुनाहों का बख़्शने वाला [3], तौबा क़बूल फ़रमाने वाला [4], सख़्त अज़ाब देने वाला [5], बड़ा फ़ज़्ल व एहसान फ़रमाने वाला [6]; उसके सिवा कोई माबूद नहीं, उसी की तरफ़ पलट कर जाना है [7] ।"

[3] ग़ाफ़िरुज़्ज़म्ब—गुनाहों की मुआफ़ी

अल्लाह तआला 'ग़ाफ़िरुज़्ज़म्ब' है, यानी सच्चे दिल से रुजूअ करने वालों के बड़े से बड़े गुनाह को भी माफ़ फ़रमा देने वाला है।

[4] क़ाबिलुत-तौब—तौबा की बार-बार क़बूलियत

वह बार-बार तौबा क़बूल फ़रमाता है। बंदा कितनी ही बार लग़्ज़िश का शिकार हो, जब भी सच्चे इख़्लास से तौबा करेगा, अल्लाह की बारगाह का दरवाज़ा खुला पाएगा।

[5] शदीदुल-इक़ाब—सरकशों के लिए सख़्त अज़ाब

जो लोग तकब्बुर और हठधर्मी पर अड़े रहें, उनके लिए अल्लाह का अज़ाब निहायत सख़्त और भयानक है। यह सिफ़त बंदे के दिल में ख़ौफ़-ए-ख़ुदा पैदा करती है।

[6] ज़ुत-तौल—बेपनाह फ़ज़्ल व अता का मालिक

वह 'ज़ुत-तौल' है यानी बेपनाह इनाम, एहसान और नेमतों का मालिक है, जो बग़ैर किसी इवज़ के बंदों पर अपनी रहमतों की बारिश फ़रमाता है।

[7] रुजूअ सिर्फ़ उसी की तरफ़

आख़िरकार सबको उसी की बारगाह में पेश होना है जहाँ हर अमल का पूरा-पूरा हिसाब होगा।

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