कुरान - 40:4 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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مَا يُجَٰدِلُ فِيٓ ءَايَٰتِ ٱللَّهِ إِلَّا ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ فَلَا يَغۡرُرۡكَ تَقَلُّبُهُمۡ فِي ٱلۡبِلَٰدِ

Transliteration: (Maa yujaadilu feee Aayaatil laahi illal lazeena kafaroo falaa yaghrurka taqallubuhum fil bilaad)

अल्लाह की आयतों में झगड़ा वही लोग करते हैं जो काफ़िर हैं [8], तो (ऐ सुनने वाले!) शहरों में उनका (शान व शौकत से) चलना-फिरना तुझे धोखे में न डाले [9] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 4

"अल्लाह की आयतों में झगड़ा वही लोग करते हैं जो काफ़िर हैं [8], तो (ऐ सुनने वाले!) शहरों में उनका (शान व शौकत से) चलना-फिरना तुझे धोखे में न डाले [9] ।"

[8] आयतों में बातिल झगड़ा

हक़ को दबाने, झुठलाने या उसका मज़ाक़ उड़ाने की नीयत से आयतों में नुक्ताचीनी करना काफ़िरों की ख़ासियत है। इसके बरअक्स अहकाम को समझने और हिकमतें तलाशने के लिए ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना इबादत है।

[9] काफ़िरों की ज़ाहिरी चमक-दमक फ़रेब है

काफ़िरों की दुनियावी दौलत, तिजारत, और शहरों में उनका ठाठ-बाट महज़ चन्द रोज़ा आज़माइश और ढील है। यह ज़ाहिरी रौनक किसी को धोखे में न डाले, क्योंकि उनका आख़िरी अंजाम हलाकत और दायमी अज़ाब है।

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