कुरान - 40:50 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
قَالُوٓاْ أَوَلَمۡ تَكُ تَأۡتِيكُمۡ رُسُلُكُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِۖ قَالُواْ بَلَىٰۚ قَالُواْ فَٱدۡعُواْۗ وَمَا دُعَـٰٓؤُاْ ٱلۡكَٰفِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَٰلٍ

Transliteration: (Qaalooo awalam taku taateekum Rusulukum bilbaiyinaati qaaloo balaa' qaaloo fad'oo; wa maa du'aaa'ul kaafireena illaa fee dalaal (section 5))

वे (फ़रिश्ते) कहेंगे: 'क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल रोशन निशानियां लेकर नहीं आते थे?' वे कहेंगे: 'हाँ क्यों नहीं!' वे कहेंगे: 'तो फिर तुम्हीं दुआ करो [130]', और काफ़िरों की दुआ तो सिर्फ़ भटकाव (बेअसर) ही में है [131] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 50

"वे (फ़रिश्ते) कहेंगे: 'क्या तुम्हारे पास तुम्हारे रसूल रोशन निशानियां लेकर नहीं आते थे?' वे कहेंगे: 'हाँ क्यों नहीं!' वे कहेंगे: 'तो फिर तुम्हीं दुआ करो [130]', और काफ़िरों की दुआ तो सिर्फ़ भटकाव (बेअसर) ही में है [131] ।"

[130] फ़रिश्तों का दो-टूक जवाब

फ़रिश्ते फ़रमाएंगे कि जब रसूलों ने तुम्हें समझाया था तो तुमने न माना, अब हम काफ़िरों के लिए कोई दुआ नहीं करेंगे, तुम्हीं पुकारते रहो।

[131] काफ़िरों की दुआ का ज़ाया होना

दोज़ख़ में काफ़िरों की कोई दुआ या फ़रियाद क़बूल नहीं होगी, वह महज़ चीख़-पुकार और ज़ाया होगी।

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