कुरान - 40:52 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
يَوۡمَ لَا يَنفَعُ ٱلظَّـٰلِمِينَ مَعۡذِرَتُهُمۡۖ وَلَهُمُ ٱللَّعۡنَةُ وَلَهُمۡ سُوٓءُ ٱلدَّارِ

Transliteration: (Yawma laa yanfa'uz zaalimeena ma'ziratuhum wa lahumul la'natu wa lahum soooud daar)

जिस दिन ज़ालिमों को उनका बहाना कुछ नफ़ा न देगा [134], और उनके लिए लानत है [135], और उनके लिए बुरा ठिकाना है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 52

"जिस दिन ज़ालिमों को उनका बहाना कुछ नफ़ा न देगा [134], और उनके लिए लानत है [135], और उनके लिए बुरा ठिकाना है।"

[134] काफ़िरों के बहानों की बेसूदी

उस दिन काफ़िरों के हीले-हवाले और उज़्र कोई काम न आएंगे क्योंकि हक़ पूरी तरह साबित हो चुका होगा।

[135] लानत और बुरा ठिकाना

काफ़िरों पर अल्लाह की, फ़रिश्तों की और तमाम कायनात की लानत होगी और जहन्नम उनका दायमी और बदतरीन ठिकाना होगा।

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