कुरान - 40:51 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
إِنَّا لَنَنصُرُ رُسُلَنَا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ فِي ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَيَوۡمَ يَقُومُ ٱلۡأَشۡهَٰدُ

Transliteration: (Innaa lanansuru Rusulanaa wallazeena aamanoo fil hayaatid dunyaa wa Yawma yaqoomul ashhaad)

बेशक हम अपने रसूलों और ईमान वालों की दुनिया की ज़िंदगी में ज़रूर मदद फ़रमाते हैं [132], और उस दिन भी जब गवाह खड़े होंगे [133] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 51

"बेशक हम अपने रसूलों और ईमान वालों की दुनिया की ज़िंदगी में ज़रूर मदद फ़रमाते हैं [132], और उस दिन भी जब गवाह खड़े होंगे [133] ।"

[132] दुनिया में नुसरत-ए-इलाही का वा'दा

अल्लाह तआला अपने रसूलों और सच्चे अहले ईमान की दुनिया में हुज्जत व दलील, ग़लबा-ए-दीन और दुश्मनों पर फ़तह के ज़रिये मदद फ़रमाता है। आज़माइशें आरज़ी होती हैं, आख़िरी कामयाबी मोमिनीन ही की है।

[133] क़ियामत के दिन गवाहों की हाज़िरी में मदद

क़ियामत के दिन जब अंबिया, मलाइका और उम्मत-ए-मुहम्मदिया गवाही के लिए खड़े होंगे, उस दिन भी अल्लाह तआला मोमिनीन को इज़्ज़त व मग़फ़िरत से नवाज़ कर उनकी नुसरत फ़रमाएगा।

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