कुरान - 40:54 सूरह ग़ाफ़िर अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
هُدٗى وَذِكۡرَىٰ لِأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ

Transliteration: (Hudanw wa zikraa li ulil albaab)

अक़्लमंदों के लिए हिदायत और नसीहत के तौर पर [138] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह ग़ाफ़िर आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह ग़ाफ़िर (अल-मोमिन) तफ़सीर - आयत 54

"अक़्लमंदों के लिए हिदायत और नसीहत के तौर पर [138] ।"

[138] उलू-अलबाब (साहिब-ए-अक़्ल) के लिए नसीहत

आसमानी किताबें और नबियों की तालीमात उन लोगों के लिए हिदायत व नसीहत का ज़रिया हैं जो अपनी अक़्ल-ए-सलीम को हक़ की पहचान के लिए इस्तेमाल करते हैं।

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