Transliteration: (Fasbir inna wa'dal laahi haqqunw wastaghfir lizambika wa sabbih bihamdi Rabbika bil'ashiyyi wal ibkaar)
"तो (ठपà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥‡ महबूब!) आप सबà¥à¤° फ़रमाइà¤, बेशक अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का वा'दा सचà¥à¤šà¤¾ है [139], और अपने (ख़ास व उमà¥à¤®à¤¤ के) लोगों के लिठमग़फ़िरत तलब फ़रमाइठ[140], और सà¥à¤¬à¤¹ व शाम अपने रब की हमà¥à¤¦ के साथ तसà¥à¤¬à¥€à¤¹ करते रहिठ[141] ।"
हà¥à¤œà¤¼à¥‚र ï·º को तसलà¥à¤²à¥€ दी गई कि कà¥à¤«à¤¼à¥à¤«à¤¼à¤¾à¤° की मà¥à¤–़ालफ़त पर सबà¥à¤° फ़रमाà¤à¤‚, अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ का वा'दा-à¤-नà¥à¤¸à¤°à¤¤ बिलà¥à¤•à¥à¤² सचà¥à¤šà¤¾ है और इसà¥à¤²à¤¾à¤® तमाम दीनों पर ग़ालिब होकर रहेगा।
हà¥à¤œà¤¼à¥‚र सलà¥à¤²à¤²à¥à¤²à¤¾à¤¹à¥ अलैहि व सलà¥à¤²à¤® मासूम-अनिल-ख़ता हैं। आप अपनी उमà¥à¤®à¤¤ के गà¥à¤¨à¤¾à¤¹à¤—ारों की शफ़ाअत और बख़à¥à¤¶à¤¿à¤¶ के लिठबारगाह-à¤-इलाही में इसà¥à¤¤à¤¿à¤—़फ़ार फ़रमाते हैं जो उमà¥à¤®à¤¤ के लिठरहमत-à¤-अज़ीम है।
सà¥à¤¬à¤¹ व शाम अलà¥à¤²à¤¾à¤¹ की हमà¥à¤¦ और नमाज़ों की पाबंदी हर मोमिन का शेवा होनी चाहिà¤à¥¤
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